चन्द पन्नों पे सिमट जाए वो किस्सा नहीं है हम, मुद्दतों बाद भी अधूरी है दास्तानें ज़िन्दगी अपनी…💯
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चन्द पन्नों पे सिमट जाए वो किस्सा नहीं है हम, मुद्दतों बाद भी अधूरी है दास्तानें ज़िन्दगी अपनी…💯
चेहरे पर मुस्कुराहट होती है और दिल घबराता है,
ऐ दोस्त, मुझे स्कूल का पहला दिन याद आता है.
इक तरफ ज़मीं से आसमां छूने को जी करता है,
इक तरफ होंठों से ज़मीं चूमने को जी करता है...
इन चार दीवारों की सरहदें भी तो मुक्कमल है,
शाम होते ही दोनों जहां घूमने को जी करता है...