Poetry

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Aaakhir me ek insaan hu || hindi poetry

*क्षमा दान की शक्ति*

आखिर मैं एक इंसान हूँ,पर आप तो हो भगवान।
जो भी होता है नियति है,नहीं पता मुझे परिणाम।
मैंने जो अब तक कि गलती,जो आगे करने वाला हूँ।
हे प्रभु! आज अतिरिक्त में,मुझको दे दो क्षमा दान।
आपने जो भी है दिया सबको, उसमें रहना सन्तुष्ट सभी।
स्वार्थ और ईर्ष्यावश में,नहीं होना है पथभ्रष्ट कभी।
इंसान गलतियों का पुतला,हो सका कभी परिपूर्ण नहीं।
फिर मद में अन्धा होकर वो,भूल जाता ही है गलत सही।
पर आप दया के सागर हो,करुणा के हो भंडार प्रभु।
सब के मन से द्वेष को करके दूर, आप सब मे भर दो प्यार प्रभु!
सब जीव आपकी संताने,न करें कोई भी भेदभाव।
बन जाओ सब मन से उदार,करें क्षमा द्वेष का हो अभाव।
सच्चे मन से करे प्रायश्चित तो,प्रभु हर अपराध क्षमा कर जाते हैं।
आप सर्वशक्तिमान इसी कारण ही,सब के द्वारा कहलाते हैं।
सच में वो ही है शक्तिमान,जिसने है सब को माफ किया।
भूल के सारी बातों को ,हर किसी का है जो साथ दिया।

રાહ મા ઉભો રહી ગયો || poetry

ખોટો હું તારી સામે હસી ગયો
ખોટો હું તારા પ્રેમ માં પડી ગયો

ખબર હતી તું નથી થવાની મારી સાથે સેટ
છતાંય બધા સામે હું ભોઠો પડી ગયો

ખોટો હું તારી રાહ માં ઉભો રહી ગયો
તું આવી નહિ ને હું લેટ થઈગયો

પાછો વળી ગયો હોત તો સારુ થાત
પણ છતાંય હું તારા પ્રેમ માં આગળ વધી ગયો

તને મળવા નું મન મને બહુજ હતું
પણ રસ્તા માંજ રસ્તો ભૂલી ગયો

તું મનેજ પ્રેમ કરે છે એ મને શી ખબર
ખોટો હું તારી પાછળ ગાંડો થઈ ગયો

તારા આવવાની રાહ મેં બહુ જોઈ
પણ બસ હવે રેવાદે હું પરણી ગયો.

જીતયું

Ek aasha || hindi poetry || kavita

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      एक आशा 

एक आशा की चाह है मुझे आजकल
एक आशा की चाह है मुझे आजकल
क्यों अब तरस रही हैं आंखें मेरी आजकल!!
गया वो ज़माना जब खुद पर हम इतराते थे होकर बे फ़िक्र
गया वो ज़माना जब खुद पर हम इतराते थे होकर बे फ़िक्र
नज़र मैं आते थे हम सबकी जैसे हो एक खिली दोपहर!!
अचानक ये क्या हुआ क्यों लग गयी हमें किसी की नज़र
ग़र्दिशों का अब तो एक मेला हैं जिसमे मुझे चलना अकेला हैं!!
खामोशियाँ अब इतनी बढ़ रही हैं आजकल
कुछ नया पाने की चाह हो रही है मुझे आजकल
वो हंसना हम बूल क्यों गए आजकल
एक ठहराव सा आ गया है ज़िन्दगी मैं आजकल
बस एक आशा की चाह हे मुझे आजकल!!

Sunee@zindagiterenaam.com

Tumhe ghar chhod du || hindi poetry love

❣️”चलो भी जान तुम्हे घर छोड़ दूं”❣️

 समझ नही आता,किस पर लिखूं,किस पर छोड़ दूं
अब क्या करूं इन बातों का,इन्हे यही पर छोड़ दूं

 तुमने गली छोड़ी, मुझे छोड़ा,सब तो छोड़ दिया
मैं कैसे ये आसमान,मकान,अपना शहर छोड़ दूं

 मेरे पीछे मत आओ मेरा सफर काफी दूर तक है,
चलो भी जान,इश्क नही आसान,तुम्हे घर छोड़ दूं

 तुम्हारी यांदो को तो आना जाना है जिंदगी भर
फिर एक तुम्हे याद करना भी है,बेहतर छोड़ दूं

 मैं टूटकर खुद,राह बन गईं हूं,राहगीरों के लिए
और तुम कहते हो जिंदगी का ये सफर छोड़ दूं 

 जहर काफी है दर्द में,मसला इश्क है मेरे जान
और तुम क्यों कहते हो,मैं इश्क का जहर छोड़ दूं

 तुम लौट आए,तो क्यों आए हो अब बताना जरा
तुमने क्या कहा मैं ये शायरी और गजल छोड़ दूं

 तुमने गली छोड़ी,सफर छोड़े,घर बदल लिए
अब क्यों चाहते हो तुम,मैं मेरा शहर छोड़ दूं

 “हर्ष” क्या करूं इन बातों का,इन्हे यही पर छोड़ दूं
अब चलो भी जान,कहना लो मान,तुम्हे घर छोड़ दूं

Paise kaa dabdbaa hai sab jaga 

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 पैसे का दबदबा हैं सब जगह
क्यों पैसे का दबदबा है सब जगह!
काँटों मैं फूलों की खुशबू क्यों सुंगाता है पैसा
पैसा न हो तो परेशानी पैसा हो तो ऊपर वाले की मेहरबानी!!
सब के होश क्यों उड़ाता हैं पैसा
हर ग़म की दवा क्यों बन जाता है ये पैसा!!
न हो तो क्यों इतना तड़पाता है ये पैसा
ये पैसा क्यों हमेशा से है ऐसा!

sunee@zindagiterenaam.com

Ek aurat || hindi poetry

👧 *बाँझपन एक कलंक क्यों ???*👧

एक औरत माँ बने तो जीवन सार्थक
अगर माँ न बने तो जीवन ही निरथर्क,
किसने कहा है ये, कहाँ लिखा है ये,
कलंकित बोल-बोल जीवन बनाते नरक।

बाँझ बोलकर हर कोई चिढ़ाते,
शगुन-अपशगुन की बात समझाते।
बंजर ज़मीं का नाम दिया है मुझे,
पीछे क्या, सामने ही मेरा मज़ाक़ उड़ाते।

ममत्व का पाठ मैं भी जानती,
हर बच्चे को अपना मानती,
कोख़ से जन्म दूँ, ज़रूरी नहीं,
लहू का रंग मैं भी पहचानती।

आँचल में मेरे है प्यार भरा,
ममता की मूरत हूँ देख ज़रा,
क़द्र जानूँ मैं बच्चों की,
नज़र से मुझे ज़माने न गिरा।

कलंक नहीं हूँ इतना ज़रा बता दूँ,
समाज को एक नया पाठ सीखा दूँ,
बच्चा न जन्म दे सकी तो क्या,
समाज पे बराबर का हक़ मैं जता दूँ।
समाज पे बराबर का हक़ मैं जता दूँ।

Haa maa haa || Maa shayari || love

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माँ, हाँ माँ हाँ, मुझे तू चाहिए
ग़म के धरियां में खोया हूँ
तेरा सहारा चाहिए!!
सब ने मुझे ठुकरा दिया हैं
मगर मुझे तू चाहिए!!
तन्हाई ने मुझे डस लिया है
मगर मुझे तू चाहिए!!
वो प्यार, वो एहसास चाहिए
वो प्यार बरी निगाह और वो, तेरे काँधे का सहारा चाहिए!!
ज़िन्दगी तो चल रही है, मगर एक कमी सी हैं,जो दिल में खल्ल रही है
आजा मेरी माँ आजा, क्यों मुझसे तू इतना दूर जा रही है!!!
बहुत याद आती हैं तेरी, बहुत याद आती हैं तेरी, माँ
मरने का जी करता है मेरा, कई बार मरने का जी करता है मेरा
पर हर बार की तरह, क्यों तुम मेरे सिरहाने आ जाती हो माँ
तेरे पास आना है मुझे, बहुत जल्द तेरे पास आना है मुझे,
तुमसे इतनी दूर नहीं अभ जाना है मुझे!!
तुमसे इतनी दूर नहीं अभ जाना है मुझे!!!

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Pedh ka ek || Awesome hindi shayari || kavita

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              एक पत्ता
पेड़ का एक पत्ता गिर के यह कह गया,
कि मेरी ज़िन्दगी ख़तम है,यह कहकर वह बह गया!!
बेहता बेहता पंहुचा वह एक किनारे पर,
जहाँ हज़ारों चींटियां बैठी थी अपने निशाने पर,
हमेशा राशन इक्कट्ठा करती थी वह, मगर आज इस कश्मकश में थी, 
कि अचानक यह कौन आया उनके सिराहने पर!!
एक लहर ऐसी आई जिससे वह पत्ता बह गया एक और किनारे पर,
वहां उसे एक मकड़ी मिली जो कह रही इशारे से 
अगर तुम गिरे न होते पेड़ से तो क्यों भटकते इस तरह वीराने से!!!!

Sunee#zindagiterenaam.com