चार कदम चोर से , चार सौ
कदम चुगलखोर से हमेशा
दूरी बना के रखो |🙌
चार कदम चोर से , चार सौ
कदम चुगलखोर से हमेशा
दूरी बना के रखो |🙌
Me us bebas te lachaar panchhi di tarah mehsoos
kar rahi haa jihde ch haunsla taa bathera aa
uchi ton uchi udaan bharan da par ohde parr
katte hoye aaa
ਮੈਂ ਉਸ ਬੇਬਸ ਤੇ ਲਾਚਾਰ ਪੰਛੀ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਹਿਸੂਸ
ਕਰ ਰਹੀਂ ਹਾਂ ਜਿਹਦੇ ਚ’ ਹੌਂਸਲਾ ਤਾਂ ਬਥੇਰਾ ਆ
ਉੱਚੀ ਤੋਂ ਉੱਚੀ ਉਡਾਨ ਭਰਨ ਦਾ ਪਰ ਉਹਦੇ
ਪਰ੍ਹ ਕੱਟੇ ਹੋਏੇ ਆ
चलो किसी पुराने दौर की बात करते हैं,
कुछ अपनी सी और कुछ अपनों कि बात करते हैं…
बात उस वक्त की है जब मेरी मां मुझे दुलारा करती थी,
नज़रों से दुनिया की बचा कर मुझे संवारा करती थी,
गलती पर मेरी अकेले डांट कर पापा से छुपाया करती थी,
और पापा के मुझे डांटने पर पापा से बचाया करती थी…
मुझे कुछ होता तो वो भी कहाँ सोया करती थी,
देखा है मैंने,
वो रात भर बैठकर मेरे बाल संवारा करती थी,
घर से दूर आकर वो वक्त याद आता है,
दिन भर की थकान के बाद अब रात के खाने में, कहां मां के हाथ का स्वाद आता है,
मखमल की चादर भी अब नहीं रास आती है,
माँ की गोद में जब सिर हो उससे अच्छी नींद और कहाँ आती है…