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ज़िन्दगी जीना सीखा रही थी || zindagi shayari

कल एक झलक ज़िंदगी को देखा,
वो राहों पे मेरी गुनगुना रही थी,

फिर ढूँढा उसे इधर उधर
वो आँख मिचौली कर मुस्कुरा रही थी,

एक अरसे के बाद आया मुझे क़रार,
वो सहला के मुझे सुला रही थी

हम दोनों क्यूँ ख़फ़ा हैं एक दूसरे से
मैं उसे और वो मुझे समझा रही थी,

मैंने पूछ लिया- क्यों इतना दर्द दिया
कमबख्त तूने,
वो हँसी और बोली- मैं जिंदगी हूँ पगले
तुझे जीना सिखा रही थी।

Title: ज़िन्दगी जीना सीखा रही थी || zindagi shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Deja deedar sajjna || Punjabi shayari || true love shayari || Punjabi status

Milna tera c jive rooh nu rabb milna
Pahunche arsha te c jive maar udaari
Tere jaan to baad Na chain aaya kite
Vjji seene te mohobbat di satt bhari
Dil cheez hi rbb ne bnayi esi
Pyar mile Na mile eh ta hundi haari
Pyar jani Na iklle fullan di saij kidre
Jaan kddn te ondi e roohan di yaari
Noor dekheya c ik tere chehre utte
Mano lath hi gyi c eh duniya sari
Akhan bhukhiya peyasiyan awaj marn
Deja didar ta sajjna tu ik vari

ਮਿਲਣਾ ਤੇਰਾ ਸੀ ਜਿਵੇਂ ਰੂਹ ਨੂੰ ਰੱਬ ਮਿਲਣਾ
ਪਹੁੰਚੇ ਅਰਸ਼ਾਂ ਤੇ ਸੀ ਜਿਵੇਂ ਮਾਰ ਉਡਾਰੀ..!!
ਤੇਰੇ ਜਾਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਨਾ ਚੈਨ ਆਇਆ ਕਿਤੇ
ਵੱਜੀ ਸੀਨੇ ਤੇ ਮੋਹੁੱਬਤ ਦੀ ਸੱਟ ਭਾਰੀ..!!
ਦਿਲ ਚੀਜ਼ ਹੀ ਰੱਬ ਨੇ ਬਣਾਈ ਐਸੀ
ਪਿਆਰ ਮਿਲੇ ਨਾ ਮਿਲੇ ਇਹ ਤਾਂ ਹੁੰਦੀ ਹਾਰੀ..!!
ਪਿਆਰ ਜਾਣੀ ਨਾ ਇਕੱਲੇ ਫੁੱਲਾਂ ਦੀ ਸੇਜ ਕਿੱਧਰੇ
ਜਾਨ ਕੱਢਣ ਤੇ ਆਉਂਦੀ ਏ ਰੂਹਾਂ ਦੀ ਯਾਰੀ..!!
ਨੂਰ ਦੇਖਿਆ ਸੀ ਇੱਕ ਤੇਰੇ ਚਿਹਰੇ ਉੱਤੇ
ਮਨੋ ਲੱਥ ਹੀ ਗਈ ਸੀ ਇਹ ਦੁਨੀਆ ਸਾਰੀ..!!
ਅੱਖਾਂ ਭੁੱਖੀਆਂ ਪਿਆਸੀਆਂ ਅਵਾਜ ਮਾਰਨ
ਦੇ ਜਾ ਦੀਦਾਰ ਤਾਂ ਸੱਜਣਾ ਤੂੰ ਇੱਕ ਵਾਰੀ..!!

Title: Deja deedar sajjna || Punjabi shayari || true love shayari || Punjabi status


अकबर-बीरबल और जादुई गधे || hindi story

एक समय की बात है, बादशाह अकबर ने अपने बेगम के जन्मदिन के लिए बहुत ही खूबसूरत और बेशकीमती हार बनवाया था। जब जन्मदिन आया, तो बादशाह अकबर ने वह हार अपनी बेगम को तोहफे में दे दिया, जो उनकी बेगम को बहुत पसंद आया। अगली रात बेगम साहिबा ने वह हार गले से उतारकर एक संदूक में रख दिया। जब इस बात को कई दिन गुजर गए, तो एक दिन बेगम साहिबा ने हार पहने के लिए संदूक खोला, लेकिन हार कहीं नहीं मिला। इससे वह बहुत उदास हो गईं और इस बारे में बादशाह अकबर को बताया। इस बारे में पता चलते ही बादशाह अकबर ने अपने सैनिकों को हार ढूंढने का आदेश दिया, लेकिन हार कहीं नहीं मिला। इससे अकबर को यकीन हो गया कि बेगम का हार चोरी हो गया है।

फिर अकबर ने बीरबल को महल में आने के लिए बुलावा भेजा। जब बीरबल आया, तो अकबर ने सारी बात बताई और हार को खोज निकालने की जिम्मेदारी उसे सौंप दी। बीरबल ने समय व्यर्थ किए बिना ही राजमहल में काम करने वाले सभी लोगों को दरबार में आने के लिए संदेश भिजवाया। थोड़े ही देर में दरबार लग गया। दरबार में अकबर और बेगम सहित सभी काम करने वाले हाजिर थे, लेकिन बीरबल दरबार में नहीं था। सभी बीरबल का इंतजार कर ही रहे थे कि तभी बीरबल एक गधा लेकर राज दरबार में पहुंच जाता है। देर से दरबार में आने के लिए बीरबल बादशाह अकबर से माफी मांगता है। सभी सोचने लगते हैं कि बीरबल गधे को लेकर राज दरबार में क्यों आया है। फिर बीरबल बताता है कि यह गधा उसका दोस्त है और उसके पास जादुई शक्ति है। यह शाही हार चुराने वाले का नाम बता सकता है।

इसके बाद बीरबल जादुई गधे को सबसे नजदीक वाले कमरे में ले जाकर बांध देता है और कहता है कि सभी एक-एक करके कमरे में जाएं और गधे की पूंछ पकड़कर चिल्लाए “जहांपनाह मैंने चोरी नहीं की है।” साथ ही बीरबल कहता है कि आप सभी की आवाज दरबार तक आनी चाहिए। सभी के पूंछ पकड़कर चिल्लाने के बाद आखिर में गधा बताएगा कि चोरी किसने की है।

इसके बाद सभी कमरे के बाहर एक लाइन में खड़े हो गए और एक-एक करके सभी ने कमरे में जाना शुरू कर दिया। जो भी कमरे के अंदर जाता, तो पूंछ पकड़ कर चिल्लाना शुरू कर देता “जहांपनाह मैंने चोरी नहीं की है।” जब सभी का नंबर आ जाता है, तो अंत में बीरबल कमरे में जाता है और कुछ देर बाद कमरे से बाहर आ जाता है।

फिर बीरबल सभी काम करने वालों के पास जाकर उन्हें दोनों हाथ सामने करने को बोलता है और एक-एक करके सभी के हाथ सूंघने लगता है। बीरबल की इस हरकत को देखकर सभी हैरान हो जाते हैं। ऐसे ही सूंघते-सूंघते एक काम करने वाले का हाथ पकड़कर बीरबल जोर से बोलता है, “जहांपनाह इसने चोरी की है।” ये सुनकर अकबर बीरबल से कहते हैं, “तुम इतने यकीन के साथ कैसे कह सकते हो कि चोरी इस सेवक ने ही की है। क्या तुम्हें जादुई गधे ने इसका नाम बताया है।”

तब बीरबल बोलता है, “जहांपनाह यह गधा जादुई नहीं है। यह बाकी गधों की तरह साधारण ही है। बस मैंने इस गधे की पूंछ पर एक खास तरह का इत्र लगाया है। सभी सेवकों ने गधे की पूंछ को पकड़ा, बस इस चोर को छोड़कर। इसलिए, इसके हाथ से इत्र की खुशबू नहीं आ रही है।”

फिर चोर को पकड़ लिया गया और उससे चोरी के सभी सामान के साथ ही बेगम का हार भी बरामद कर लिया गया। बीरबल की इस अक्लमंदी की सभी ने सराहना की और बेगम ने खुश होकर बादशाह अकबर से उसे उपहार भी दिलवाया।

Title: अकबर-बीरबल और जादुई गधे || hindi story