गर रही हो जिंदगी बेरंग सी, अंदाज बदल दीजिये.|
हर बार लहजे को नही कभी, अल्फाज बदल दीजिये|
चाहते हो यदि जायका जिंदगी का करो
म्शक्कत इतनी सिद्दत से, की हालत बदल दीजिये |
Enjoy Every Movement of life!
गर रही हो जिंदगी बेरंग सी, अंदाज बदल दीजिये.|
हर बार लहजे को नही कभी, अल्फाज बदल दीजिये|
चाहते हो यदि जायका जिंदगी का करो
म्शक्कत इतनी सिद्दत से, की हालत बदल दीजिये |

“मरहम लगा, दर्द कम हुआ, निशान फिर भी रह गए..
चुकाया दाम हकीमा को, एहसान फिर भी रह गए..
ये जख्मी दिल जा बैठा, दवा लगाने वाली की गोद में..
कमबख्त शादी की, ना जानवर बने, ना इंसान ही रह गए…।”