हर वक़्त तू ख़ता है तू मेरा है
रात को अंधेरे में रहता सुबह उठा जैसे एक सवेरा है
मत कर अब यू दग़ाबाज़ी , मुझे सब बातों का पता है
हेम अपना बताकर गैरो से बाटीं करना ये कॉन्सी ख़ता है
मत कर ये ढोंग अब मुझे सब बातों का पता है
~shobhit
हर वक़्त तू ख़ता है तू मेरा है
रात को अंधेरे में रहता सुबह उठा जैसे एक सवेरा है
मत कर अब यू दग़ाबाज़ी , मुझे सब बातों का पता है
हेम अपना बताकर गैरो से बाटीं करना ये कॉन्सी ख़ता है
मत कर ये ढोंग अब मुझे सब बातों का पता है
~shobhit
बरसातों में शब भर भीगे भोर के मंज़र प्यासे हैं!
हमने जो भी गढ़े प्यार के सारे पैकर प्यासे हैं!
एक नशा सा घोल रहे हैं सबके मन मे ये लेकिन!
पढो़ गौर से इन नज्मों के सारे अक्षर प्यासे हैं!!
हर्ष✍️
