पेड़ लगाओ, पेड़ लगाओ,
हरा भरा जीवन बनाओ।
छाया ये हमको देते है,
फल ये हमको देते है।
बाढ़ से हमको बचाते है,
प्रदुषण दूर हटाते हैं,
हम भी पेड़ लगाएंगे,
संसार को हरा भरा बनाएंगे।
पेड़ लगाओ, पेड़ लगाओ,
हरा भरा जीवन बनाओ।
छाया ये हमको देते है,
फल ये हमको देते है।
बाढ़ से हमको बचाते है,
प्रदुषण दूर हटाते हैं,
हम भी पेड़ लगाएंगे,
संसार को हरा भरा बनाएंगे।
barbaad badnaam hai ishq
eh raah te kade chalna nahi chahida
hanjuyaa ton begair kujh v nahi rehnda aashaq de kol
ye pyaar vyaar sab fizool hai vaise eh kehna taan nahi chahida
ਬਰਬਾਦ ਬਦਨਾਮ ਹੈ ਇਸ਼ਕ
ਏਹ ਰਾਹ ਤੇ ਕਦੇ ਚੱਲਣਾ ਨਹੀਂ ਚਾਹੀਦਾ
ਹੰਜੂਆ ਤੋਂ ਬਗੈਰ ਕੁੱਝ ਵੀ ਨਹੀਂ ਰਹਿੰਦਾ ਆਸ਼ਕ ਦੇ ਕੋਲ਼
ਯੇ ਪਿਆਰ ਵਿਆਰ ਸਭ ਫਿਜੁਲ ਹੈ ਵੇਸੇ ਐਹ ਕੇਹਣਾ ਤਾਂ ਨਹੀਂ ਚਾਹੀਦਾ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
चलो किसी पुराने दौर की बात करते हैं,
कुछ अपनी सी और कुछ अपनों कि बात करते हैं…
बात उस वक्त की है जब मेरी मां मुझे दुलारा करती थी,
नज़रों से दुनिया की बचा कर मुझे संवारा करती थी,
गलती पर मेरी अकेले डांट कर पापा से छुपाया करती थी,
और पापा के मुझे डांटने पर पापा से बचाया करती थी…
मुझे कुछ होता तो वो भी कहाँ सोया करती थी,
देखा है मैंने,
वो रात भर बैठकर मेरे बाल संवारा करती थी,
घर से दूर आकर वो वक्त याद आता है,
दिन भर की थकान के बाद अब रात के खाने में, कहां मां के हाथ का स्वाद आता है,
मखमल की चादर भी अब नहीं रास आती है,
माँ की गोद में जब सिर हो उससे अच्छी नींद और कहाँ आती है…