मां की कहानी थी परीयों का फसाना था, …
गाँव के हर कोने मे अपना ठिकाना था |
वो तो उम्रो ने छीन लिया चेहरे की मुस्कुराहट
वरना वो बचपन कितना सुहाना था |
Enjoy Every Movement of life!
मां की कहानी थी परीयों का फसाना था, …
गाँव के हर कोने मे अपना ठिकाना था |
वो तो उम्रो ने छीन लिया चेहरे की मुस्कुराहट
वरना वो बचपन कितना सुहाना था |
Sochti hogi tum bhi mujhkon
bas maanti nahi hogi
Tumhain pyaar se pukarnewali
pehli awaaz joh meri thi…🍂
सोचती होगी तुम भी मुझको
बस मानती नहीं होगी
तुम्हें प्यार से पुकारनेवाली
पहली आवाज़ जो मेरी थी…🍂
