Ache hokar bhi logo ke liye bure hain socho bure hogye to kya hi hoga
अच्छे होकर भी लोगों के लिए बुरे हैं सोचो बुरे होगए तो क्या ही होगा
Ache hokar bhi logo ke liye bure hain socho bure hogye to kya hi hoga
अच्छे होकर भी लोगों के लिए बुरे हैं सोचो बुरे होगए तो क्या ही होगा
दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला
वही अंदाज़ है ज़ालिम का ज़माने वाला
अब इसे लोग समझते हैं गिरफ्तार मेरा
सख्त नदीम है मुझे दाम में लाने वाला
क्या कहें कितने मरासिम थे हमारे इस से
वो जो इक शख्स है मुंह फेर के जाने वाला
मुन्तज़िर किस का हूँ टूटी हुई दहलीज़ पे मैं
कौन आएगा यहाँ कौन है आने वाला
मैंने देखा है बहारों में चमन को जलते
है कोई ख्वाब की ताबीर बताने वाला
Shayar Bana Diya Adhuri Mohabbat Ne,
Mohabbat Agar Puri Hoti To Hum Bhi Ek Ghazal Hota!