Ache hokar bhi logo ke liye bure hain socho bure hogye to kya hi hoga
अच्छे होकर भी लोगों के लिए बुरे हैं सोचो बुरे होगए तो क्या ही होगा
Enjoy Every Movement of life!
Ache hokar bhi logo ke liye bure hain socho bure hogye to kya hi hoga
अच्छे होकर भी लोगों के लिए बुरे हैं सोचो बुरे होगए तो क्या ही होगा

अब बस लिख के मिटा हम देते हैं, अपने ही शब्दों के जाल को..
क्यूंकि अब डायरी भी समझ नहीं पाती है, मेरे मन में चलते ख्याल को..
अब पन्ने भी मेरी कलम की स्याही से, बस दूर सा होना चाहते हैं..
अब बताएं भी तो आखिर किसे बताएं, अपने इस बिगडते हाल को..