कुछ अलग ही करना है
तो वफ़ा करो मेरे दोस्त,
मज़बूरी का नाम लेकर
बेवफाई तो हर कोई करता है…🙂💔
Kuch alag hi karna hain,
Toh wafa karo mere dost,
Majburi ka naam lekar,
Bewafai toh har koi karta hain…🙂💔
कुछ अलग ही करना है
तो वफ़ा करो मेरे दोस्त,
मज़बूरी का नाम लेकर
बेवफाई तो हर कोई करता है…🙂💔
Kuch alag hi karna hain,
Toh wafa karo mere dost,
Majburi ka naam lekar,
Bewafai toh har koi karta hain…🙂💔
मुर्शिद आज चराग़-ए-ग़म जलाऊँगा मैं
आज रात भर रात का दिल दुखाऊँगा मैं
आज किताब-ए-मुहब्बत के साथ साथ
तेरी निशानियों को भी आग लगाऊँगा मैं
ऐ सितमगर एहतियात-ए-हिजाब करना
अब फ़क़त तुझपे ही क़लम उठाऊँगा मैं
Vo roye to bhut par mujhse mooh mod kar roye
Koi majboori hogi jo dil tod kar roye
Mere samne kar diye…Meri tasveer ke tukde
Pta chala mere piche vo unhe jod kar roye
वो रोए तो बहुत पर मुझसे मुंह मोड़ कर रोए,
कोई मजबूरी होगी जो दिल तोड़ कर रोए,
मेरे सामने कर दिए… मेरी तस्वीर के टुकड़े,
पता चला मेरे पीछे वो उन्हे जोड़ कर रोए।