मैं क्या कहूँ किसी से, मेरे अश्क कहते है मेरी दास्तान !
बाखुदा मेरी हर मंजिल का, इक तू ही तो है रास्ता!
Enjoy Every Movement of life!
मैं क्या कहूँ किसी से, मेरे अश्क कहते है मेरी दास्तान !
बाखुदा मेरी हर मंजिल का, इक तू ही तो है रास्ता!
Jinhe pahuchana tha paigam aman ka is jaha me
Wo hindu aur muslim ke maslo me uljhe hue hai
जिन्हें पहुंचाना था पैगाम अमन का इस जहान में
वो हिन्दू और मुस्लिन के मसलों में उलझे हुए हैं
