मैं क्या कहूँ किसी से, मेरे अश्क कहते है मेरी दास्तान !
बाखुदा मेरी हर मंजिल का, इक तू ही तो है रास्ता!
मैं क्या कहूँ किसी से, मेरे अश्क कहते है मेरी दास्तान !
बाखुदा मेरी हर मंजिल का, इक तू ही तो है रास्ता!
कहीं देखा हैं तुमने उसे
जो मुझे सताया करता था
जब भी उदास होती थी मैं
मुझे हँसाया करता था
एक प्यार भरा रिश्ता था वो मेरा
जो मुझे अब भी याद आता हैं
खो गया वक्त के भँवर में कहीं
जो हर पल मेरे साथ होता था
आज एक अजनबी की तरह हाथ मिलाता हैं
जो छोटी से छोटी बात मुझे बताया करता था
कहीं मिले वो किसी मोड़ पर
तो उसे मेरा संदेशा देना
कोई है जो आज भी उसका इंतजार कर रहा है
जिसे वो मेरा सच्चा साथी बोला करता था.
ਮੌਤ ਦੀ ਗੋਦ ਵਿੱਚ ਸੌਣ ਨੂੰ ਜੀ ਕਰਦਾ ਹੈ
ਉਹਦੀ ਯਾਦ ਆਉਂਦੀ ਜਦੋਂ, ਪਤਾ ਨੀ ਕਿਉਂ
ਇਕੱਲਾ ਬਹਿ ਕੇ ਰੋਣ ਨੂੰ ਜੀ ਕਰਦਾ
maut di gaud vich saun nu g karda
ohdi yaad aundi hai jadon, pata ni kyu
ekalla beh k raun nu g karda