मायूसी से भरी सुबह्य
बैचैनी मैं शाम होगी
मुस्कुराना छोड़ कर इक गुम सूम सी जान होगी
आगे बढ़ने के चक्कर मैं कितना सारा छोड़ आए हम
अब तन्हा अच्छा लगता है लगता है बड़े हो गए हम।💯
Enjoy Every Movement of life!
मायूसी से भरी सुबह्य
बैचैनी मैं शाम होगी
मुस्कुराना छोड़ कर इक गुम सूम सी जान होगी
आगे बढ़ने के चक्कर मैं कितना सारा छोड़ आए हम
अब तन्हा अच्छा लगता है लगता है बड़े हो गए हम।💯
Gaira’n di te koi gl ni,
Apnea da shddeya saath likha
Kuch rul gye mere to,
Kuch geeta’n de saaz likha
न जाने किस हुनर को शायरी कहते हो तुम,
हम तो वो लिखते हैं जो तुमसे कह नहीं पाते।
ਨਾਹੀ ਪਤਾ ਕਿ ਤੁਸੀਂ ਕਿਸ ਹੁਨਰ ਨੂੰ ਸ਼ਾਇਰੀ ਕਹਿੰਦੇ ਹੋ, ਅਸੀਂ ਤਾਂ ਉਹੀ ਲਿਖਦੇ ਹਾਂ ਜੋ ਅਸੀਂ ਤੁਹਾਡੇ ਨੂੰ ਕਹਿ ਨਹੀਂ ਪਾਂਦੇ।
I don’t know what skill you call poetry, we just write what we cannot tell you.