मायूसी से भरी सुबह्य
बैचैनी मैं शाम होगी
मुस्कुराना छोड़ कर इक गुम सूम सी जान होगी
आगे बढ़ने के चक्कर मैं कितना सारा छोड़ आए हम
अब तन्हा अच्छा लगता है लगता है बड़े हो गए हम।💯
मायूसी से भरी सुबह्य
बैचैनी मैं शाम होगी
मुस्कुराना छोड़ कर इक गुम सूम सी जान होगी
आगे बढ़ने के चक्कर मैं कितना सारा छोड़ आए हम
अब तन्हा अच्छा लगता है लगता है बड़े हो गए हम।💯
Woh bhi nadaan aur ham bhi naadan the
woh kisi aur ke khyaalo me madhosh ham unke liye pareshaan the
ਵੋਹ ਵੀ ਨਾਦਾਨ ਔਰ ਹਮ ਵੀ ਨਾਦਾਨ ਥੇ,,
ਵੋਹ ਕਿਸੀ ਔਰ ਕੇ ਖ਼ਿਆਲੋਂ ਮੇ ਮਦਹੋਸ਼ ਹਮ ਉਨਕੇ ਲਿਏ ਪਰੇਸ਼ਾਨ ਥੇ।
वो खुशनसीब कौन है,
जिसका तुमने दीदार किया,
मैं तो मिट्टी हो चला हूं इस मिट्टी में,
तुम्हारे साएं का पीछा करते करते... Woh khushnaseeb kon hai jiska tumne deedar kiya
me to mitti ho chala hu is mitti me
tumahre saaye ka peesha karte karte