मायूसी से भरी सुबह्य
बैचैनी मैं शाम होगी
मुस्कुराना छोड़ कर इक गुम सूम सी जान होगी
आगे बढ़ने के चक्कर मैं कितना सारा छोड़ आए हम
अब तन्हा अच्छा लगता है लगता है बड़े हो गए हम।💯
Enjoy Every Movement of life!
मायूसी से भरी सुबह्य
बैचैनी मैं शाम होगी
मुस्कुराना छोड़ कर इक गुम सूम सी जान होगी
आगे बढ़ने के चक्कर मैं कितना सारा छोड़ आए हम
अब तन्हा अच्छा लगता है लगता है बड़े हो गए हम।💯
ਤਕਦੀਰ ਉਤੇ ਰੱਬਾ ਸਾਡਾ ਜੋਰ ਕੋਈ ਨਾ
ਤੇਰੇ ਤੋਂ ਵਗੈਰ ਸਾਡਾ ਹੋਰ ਕੋਈ ਨਾ
ਜਿਥੇ ਜਿਥੇ ਸੀਸ ਮੈਂ ਝੁਕਾਵਾਂ ਮਾਲਕਾ
ਉਥੇ ਤੇਰਾ ਹੀ ਦੀਦਾਰ ਬਸ ਪਾਵਾਂ ਮਾਲਕਾ ☝
