Vakt or jindgi ka gjb khel h ,,
Jb jindgii thi, tb kuch krne ko vakt nhi Mila
Jb vakt Mila , to jindgi guzr gyi
वक्त और जिंदगी का गज़ब खेल है,,
जब जिंदगी थी , तब कुछ करने को वक्त नहीं मिला
जब वक्त मिला, तो जिंदगी गुज़र गई।।
Vakt or jindgi ka gjb khel h ,,
Jb jindgii thi, tb kuch krne ko vakt nhi Mila
Jb vakt Mila , to jindgi guzr gyi
वक्त और जिंदगी का गज़ब खेल है,,
जब जिंदगी थी , तब कुछ करने को वक्त नहीं मिला
जब वक्त मिला, तो जिंदगी गुज़र गई।।
मान लिखूँ सम्मान लिखूँ मैं।
आशय और बखान लिखूं मैं।
जिस नारी पर दुनिया आश्रित,
उसका ही बलिदान लिखूँ मैं।।
जीवन ऐसी बहती धारा,
जिसका प्यासा स्वयं किनारा,
पत्थर पत्थर अश्क उकेरे,
अधरों पर मुस्कान लिखूँ मैं।
मान——
कोमल है कमज़ोर नहीं है,
नारी है यह डोर नहीं है,
मनमर्ज़ी इसके संग करले
इतना कब आसान लिखूँ मैं
मान—-
बेटा हो या बेटी प्यारी,
जन्म सभी को देती नारी,
इसका अन्तस् पुलकित कोमल
इसके भी अरमान लिखूँ मैं
मान—-
हिम्मत से तक़दीर बदल दे,
मुस्कानों में पीर बदल दे,
प्रेम आस विश्वास की मूरत,
शब्द शब्द गुणगान लिखूँ मैं
मान——
kabhi bin bole samajh li thi hamne har takleef uski
aaj ham karte hai byaa gam apna to bhi wo samajh nahi paate
कभी बिन बोले समझ ली थी हमने हर तकलीफ उसकी,
आज हम करते हैं बयां गम अपना तो भी वो समझ नहीं पाते।