ਹਾਏ ਰੱਬਾ ਮੈਂ ਕੀ ਕਰਾਂ ,
ਮੇਰਾ ਯਾਰ ਛੁੱਟ ਰਿਹਾ ਏ, ਮੈਂ ਕਿਵੇਂ ਜਰਾ
ਮੈਥੋਂ ਝੱਲੀ ਨੀ ਜਾ ਰਹੀ, ਇਹ ਪੀੜ ਦਿਲ ਦੀ
ਦੱਸ ਇਸ਼ਕ ਦੇ ਮਰੀਜਾਂ ਨੂੰ, ਦਵਾ ਕਿਉੰ ਨੀ ਮਿਲਦੀ।।
ਹਾਏ ਰੱਬਾ ਮੈਂ ਕੀ ਕਰਾਂ ,
ਮੇਰਾ ਯਾਰ ਛੁੱਟ ਰਿਹਾ ਏ, ਮੈਂ ਕਿਵੇਂ ਜਰਾ
ਮੈਥੋਂ ਝੱਲੀ ਨੀ ਜਾ ਰਹੀ, ਇਹ ਪੀੜ ਦਿਲ ਦੀ
ਦੱਸ ਇਸ਼ਕ ਦੇ ਮਰੀਜਾਂ ਨੂੰ, ਦਵਾ ਕਿਉੰ ਨੀ ਮਿਲਦੀ।।
ai mera janaaza uthaane vaalo,
dekhana koee bevapha paas na ho,
agar ho to us se kahana,
aaj to khushee ka mauka hai, udaas na ho..
ऐ मेरा जनाज़ा उठाने वालो, देखना कोई बेवफा पास न हो,
अगर हो तो उस से कहना, आज तो खुशी का मौका है, उदास न हो..
एक रात जब दरवाजे पर दस्तक हुई, तो लगा कोई आया होगा..
आख़िर देर रात ये है कौन। कहीं कोई बुरी खबर तो ना लाया होगा..?
बिस्तर से उठा घबराहट के साथ, रात ताला भी तो लगाया होगा..
चाबी ना जाने कहां रख दी मैंने, ऐसा होगा, रात दिमाग में ना आया होगा..
चाबी लेकर दौड़ा दरवाजे की ओर, दरवाजा तो खोलू, शायद कोई घबराया होगा..
दरवाज़ा खोला कोई नहीं था, ये कोई मज़ाक का वक़्त है, जो दरवाज़ा खटखटाया
होगा..
ना जाने कौन था ये, जो इतनी रात गऐ मेरे दर पे आया होगा..?
पूरी रात निकल गई सोचने में, ये मेरा वहम था, या सच में कोई आया होगा..