
jo beeti na teri yaado me isi koi raat nahi
yun to dekhta hu roz chaand taare mai
par sach kahu to tere jaisi kisi me baat nahi

अकबर बीरबल की हाज़िर जवाबी के बडे कायल थे। एक दिन दरबार में खुश होकर उन्होंने बीरबल को कुछ पुरस्कार देने की घोषणा की। लेकिन बहुत दिन गुजरने के बाद भी बीरबल को पुरस्कार की प्राप्त नहीं हुई। बीरबल बडी ही उलझन में थे कि महाराज को याद दिलायें तो कैसे?
एक दिन महारजा अकबर यमुना नदी के किनारे शाम की सैर पर निकले। बीरबल उनके साथ था। अकबर ने वहाँ एक ऊँट को घुमते देखा। अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल बताओ, ऊँट की गर्दन मुडी क्यों होती है”?
बीरबल ने सोचा महाराज को उनका वादा याद दिलाने का यह सही समय है। उन्होंने जवाब दिया – “महाराज यह ऊँट किसी से वादा करके भूल गया है, जिसके कारण ऊँट की गर्दन मुड गयी है। महाराज, कहते हैं कि जो भी अपना वादा भूल जाता है तो भगवान उनकी गर्दन ऊँट की तरह मोड देता है। यह एक तरह की सजा है।”
तभी अकबर को ध्यान आता है कि वो भी तो बीरबल से किया अपना एक वादा भूल गये हैं। उन्होंने बीरबल से जल्दी से महल में चलने के लिये कहा। और महल में पहुँचते ही सबसे पहले बीरबल को पुरस्कार की धनराशी उसे सौंप दी, और बोले मेरी गर्दन तो ऊँट की तरह नहीं मुडेगी बीरबल। और यह कहकर अकबर अपनी हँसी नहीं रोक पाए।
और इस तरह बीरबल ने अपनी चतुराई से बिना माँगे अपना पुरस्कार राजा से प्राप्त किया।
मैं दर्द की इंतहा पर हूं
मैं एक शख्स का बुलाया हुआ हूं
लोग मुझको गमगीन समझते हैं
मैं एक शख्स का सताया हुआ हूं
नहीं है मुझ पर कोई कर्जा
मैं हर रिश्ते को निभाया हुआ हूं
मैं लोगों से नहीं मिलता अक्सर
मैं एक राज को छुपाया हुआ हूं
मिस्बाह परवाह नहीं है रोशनी की
मैं एक शमा जला या हुआ हूं
main dard kee intaha par hoon
main ek shakhs ka bulaaya hua hoon
log mujhako gamageen samajhate hain
main ek shakhs ka sataaya hua hoon
nahin hai mujh par koee karja
main har rishte ko nibhaaya hua hoon
main logon se nahin milata aksar
main ek raaj ko chhupaaya hua hoon
misbah parvaah nahin hai roshanee kee
main ek shama jalaaya hua hoon