pyaar ch kadi dhikhawa nahi hunda
jithe dikhaawa howe, othe kadi pyaar nahi hunda
ਪਿਆਰ ‘ਚ ਕਦੀ ਦਿਖਾਵਾ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ..
ਜਿੱਥੇ ਦਿਖਾਵਾ ਹੋਵੇ,ਉੱਥੇ ਕਦੀ ਪਿਆਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ..
pyaar ch kadi dhikhawa nahi hunda
jithe dikhaawa howe, othe kadi pyaar nahi hunda
ਪਿਆਰ ‘ਚ ਕਦੀ ਦਿਖਾਵਾ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ..
ਜਿੱਥੇ ਦਿਖਾਵਾ ਹੋਵੇ,ਉੱਥੇ ਕਦੀ ਪਿਆਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ..
जो दर्द छुपा था सहमी सी आँखों में उसकी, वक़्त लगा पर दिख गया..
उसे भी शायद कोई गम था ऐसा, जो बेरहम इस जमाने से झिक गया..
आँखें मूंदी कई बार तो उसने, शायद गम को कहीं वो छुपा सके..
मगर हर आंसू जो उसकी आंखों से बहा, अपने हर दर्द की दास्तां लिख गया..
ये साफ सफाई की बात नहीं, कोरोना ने लिखी खत।
इधर उधर थुकना मत।
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गंगा की गोद में चलती है नाव, मृत शरीर भी।
समय का गोद में खिलती है सभ्यता और जंगली जानवर का अँधा बिस्वास भी।
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बचपन मासूम कली।
फल बनना और बड़ा होना- काला दाग में अशुद्ध कलि।
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कीचड़ में भी कमल खिलता है।
अच्छे घर में भी बिगड़ा हुआ बच्चा पैदा होते है।
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इंसान का अकाल नहीं, इंसानियत की अकाल है।
डॉक्टर (सेवा) के अकाल नहीं, वैक्सीन (व्यवस्था) का अकाल है।
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कुत्ते समझते है के कौन इंसान और कौन जानवर है।
बो इंसान को देख के पूंछ हिलाते है और जानवर को देख के भूँकते है।
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जीविका से प्यारा है जिंदगी।
अगर साँस बंद है तो कैसे समझेंगे रोटी की कमी।