Kamjor nhi c pr tenu kamjori bnaa lya,
Kale v khush c pr tenu apni khushi bnaa lya,
Kamjor nhi c pr tenu kamjori bnaa lya,
Kale v khush c pr tenu apni khushi bnaa lya,
डाल हिलाकर आम बुलाता तब कोयल आती है। नहीं चाहिए इसको तबला, नहीं चाहिए हारमोनियम, छिप-छिपकर पत्तों में यह तो गीत नया गाती है! चिक्-चिक् मत करना रे निक्की, भौंक न रोजी रानी, गाता एक, सुना करते हैं सब तो उसकी बानी। आम लगेंगे इसीलिए यह गाती मंगल गाना, आम मिलेंगे सबको, इसको नहीं एक भी खाना। सबके सुख के लिए बेचारी उड़-उड़कर आती है, आम बुलाता है, तब कोयल काम छोड़ आती है।
तलाश लो ये जिस्म मगर, रूह तक कैसे जाओगे,
छान लो शहर सारा मगर, दर तक कैसे जाओगे,
आओगे जब वापस तो, नज़रें झुकी होगी तुम्हारी
तड़पेगा वो जिस्म ओर तुम, गुनहगार बन जाओगे...