याद
क्या है याद?
कुछ बातें
कुछ मुलाकातें
अलबम में रखी तस्वीरें
ज़हन में घूमती तकरीरें
बारिशों में प्यास
शाम करें उदास
नींद का ख़्वाब
या फिर मिलने की फ़रियाद
क्या है याद??
याद
क्या है याद?
कुछ बातें
कुछ मुलाकातें
अलबम में रखी तस्वीरें
ज़हन में घूमती तकरीरें
बारिशों में प्यास
शाम करें उदास
नींद का ख़्वाब
या फिर मिलने की फ़रियाद
क्या है याद??
वक़्त होकर भी मुझे वक़्त ना देना, तेरी आदत सी हो गई है.. मगर तेरे वक़्त का इंतज़ार करना, मेरी इबादत सी हो गई है.. सेहमे हुए होठों से ये पूछने को दिल तो करता है.... क्या तेरे प्यार की इस जंग में मेरी, शहादत सी हो गई है..
एक दिन जिंदगी ऐसे मुकाम पर पहुँच जाएँगी
दोस्ती तो सिर्फ़ यादों में ही रह जाएँगी
हर बात दोस्तों की याद दिलायेंगी
और हँसते हँसते फिर आँख नम हो जाएँगी
ऑफिस के रूम में क्लासरूम नज़र आएँगी
पैसे तो बहोत होगा
लेकिन खर्चा करने के लम्हें कम हो जायेंगें
जी लेंगे खुल के इस पल को मेरे दोस्त
क्यूँ के जिंदगी इस पल को फिर से नहीँ दोहराएँगी