Je tu ajh suta reh gya
taan zindagi teri supneyaa ch langegi
je ajh jaag gya taan supne v
haqeeqat bann jange
ਜੇ ਤੂੰ ਅੱਜ ਸੁੱਤਾ ਰਹਿ ਗਿਆ
ਤਾਂ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਤੇਰੀ ਸੁਪਣਿਆਂ ‘ਚ ਲੰਘੇਗੀ
ਜੇ ਅੱਜ ਜਾਗ ਗਿਆ ਤਾਂ ਸੁਪਣੇ ਵੀ
ਹਕੀਕਤ ਬਣ ਜਾਣਗੇ
Je tu ajh suta reh gya
taan zindagi teri supneyaa ch langegi
je ajh jaag gya taan supne v
haqeeqat bann jange
ਜੇ ਤੂੰ ਅੱਜ ਸੁੱਤਾ ਰਹਿ ਗਿਆ
ਤਾਂ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਤੇਰੀ ਸੁਪਣਿਆਂ ‘ਚ ਲੰਘੇਗੀ
ਜੇ ਅੱਜ ਜਾਗ ਗਿਆ ਤਾਂ ਸੁਪਣੇ ਵੀ
ਹਕੀਕਤ ਬਣ ਜਾਣਗੇ
“सोचता हूँ, के कमी रह गई शायद कुछ या
जितना था वो काफी ना था,
नहीं समझ पाया तो समझा दिया होता
या जितना समझ पाया वो काफी ना था,
शिकायत थी तुम्हारी के तुम जताते नहीं
प्यार है तो कभी जमाने को बताते क्यों नहीं,
अरे मुह्हबत की क्या मैं नुमाईश करता
मेरे आँखों में जितना तुम्हें नजर आया,
क्या वो काफी नहीं था I
सोचता हूँ के क्या कमी रह गई,
क्या जितना था वो काफी नहीं था
“सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I
उनके मुँह से निकले सारे अल्फाजों को याद कर लूँ कभी I
ऐसी क्या मज़बूरी होगी उनकी की हम याद नहीं आते I
सोचता हूँ तोहफा भेज कर अपनी याद दिला दूँ कभी I
सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I

kinna ajeeb eh meri jindagi da raah nikliyaa
saare jahaan da dard meri jindagi vich likhiaa
jisde naave kiti main puri zindagi
ohi meri chahat ton bekhabar nikliyaa