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Badal Na jawi sajjna || Punjabi shayari || true love

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Zindgi ch aaya e te shdd k Na jawi..Pyr paya e te nibhavi hun tu sjjna..!!
zindgi pyar vich bdl k sadi kite bdl na jawi hun tu sjjna..!!
Zindagi ch aaya e te shadd ke Na jawi..
Pyar paya e te nibhavi hun tu sajjna..!!
zindagi pyar vich badal ke sadi
kite badal na jawi hun tu sajjna..!!

Title: Badal Na jawi sajjna || Punjabi shayari || true love

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Love poetry || Hindi Poems on mohobbat

देखा तो तुझे जब पहली बार मैंने,
अपनी आंखों पर न किया था एतबार मैंने,
क्या होता है कोई इतना भी खूबसूरत,
यही पूछा था खुदा से बार-बार मैंने।
तेरे नीले नीले नैनो ने किया था काला जादू मुझ पर,
यूं ही तो नहीं खो दिया था करार मैंने।

कायदा इश्क जब से पड़ा है,
इल्म बस इतना बचा है मुझ में,
फकत नाम तेरा मैं लिख लेता हूं, पढ़ लेता हूं।

आग बरसे चारों तरफ इस जमाने के लिए,
मेरी आंखों की नमी में हो पनाह किसी को छिपाने के लिए।
वो है खुदगर्ज बड़ी मैं जानता हूं,
लौट आएगी फिर से खुद को बचाने के लिए।

मिजाज हो गए तल्ख जब मतलब निकल गया,
ना हुई दुआ कबूल तो मजहब बदल गया।
वो जो कहते थे कि मेरी चाहत कि खुदा तुम हो,
कभी बदली उनकी चाहत कभी खुदा बदल गया।

चल मान लिया कोई तुझसे प्यारी नहीं होगी,
पर शर्त लगा लो तुम से भी वफादारी नहीं होगी।
तेरी बेवफाई ने मेरा इलाज कर दिया है,
पक्का अब हमें फिर से इश्क की बीमारी नहीं होगी।

प्यार जब भी हुआ तुमसे ही हुआ,
कोशिश बहुत की मैंने किसी और को चाहने की।
एक तो तेरा इश्क था ही और एक मैंने आ पकड़ा,
अब कोई कोशिश भी ना करना मुझ को बचाने की।

यह जो आज हम उजड़े उजड़े फिरते हैं,
हसरतें बहुत थी हमें भी दुनिया बसाने की।
मुझे आज भी तुमसे कोई गिला नहीं है,
दस्तूर ही कहां बचा है मोहब्बत निभाने का।

इस शहर में मुर्दों की तादाद बहुत है,
कौन कहता है कि ये आबाद बहुत है,
जुल्मों के खिलाफ यहां कोई नहीं बोलता,
बाद में करते सभी बात बहुत हैं।

मेरे छोटे से इस दिल में जज्बात बहुत हैं,
नींद नहीं है आंखों में ख्वाबों की बरसात बहुत है।
राह नहीं, मंजिल नहीं, पैर नहीं कुछ भी नहीं,
मुझे चलने के लिए तेरा साथ बहुत है।

दूर होकर भी तू मेरे पास बहुत है,
सगा तो नहीं मेरी पर तू खास बहुत है।
जिनकी टूट चुकी उनको छोड़ो बस,
हमें तो आज भी उनसे आस बहुत है।

Title: Love poetry || Hindi Poems on mohobbat


ਮੇਲਾ || Mela || Punjabi poem

ਕਾਰੀਗਰ ਨੇ ਆਪਦੀ ਕਾਰੀਗਰੀ ਦਿਖਾਈ

ਓਦਰੋਂ ਝੱਲੀ ਨੱਠੀ ਨੱਠੀ ਆਈ ।

ਇੱਕ ਪਾਸੇ ਚੱਲੇ ਨਾਚ

ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਬੈਠੇ ਬਾਂਦਰ ਤੇ ਮਦਾਰੀ ।

.

ਤਮਾਸ਼ਾ ਦੇਖਣ ਆਏ ਕਿੰਨੇ

ਗਿਣ ਨਹੀਂ ਸੀ ਹੁੰਦੇ ਇਨੇ

ਕੋਈ ਹੁਬਾ ਮਾਰ ਮਾਰ ਲੱਲਕਾਰੇ ਮਾਰੇ

ਕੋਈ ਨੱਚ ਨੱਚ ਦਿਖਾਵੇ ਕਾਰੇ ।

ਆਓ ਨੀ ਸਖੀਓ ਮੇਲਾ ਦੇਖਣ ਚਲੀਏ ਸਾਰੇ

.

ਲੈ ਦੇਖ ਲੈ ਗਿਣੇ ਚੁਣੇ ਆਏ ਨੇ ਖਿਡਾਰੀ

ਵਿੱਚ ਖਲੋ ਕੇ ਕਰਦੇ ਨੇ ਮਾਰਾ ਮਾਰੀ

ਫਿਰ ਗਲੇ ਮਿਲ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਦੇ ਮੁਕਾਬਲਾ

ਇੰਝ ਜਾਪੇ ਜਿਵੇਂ ਹੋਵੇ ਪੱਕੀ ਯਾਰੀ ।

ਇੱਕ ਪੱਟ ਤੇ ਦੂਜਾ ਧੋਣ ਤੇ ਮਾਰੇ ,

ਆਓ ਨੀ ਸਖੀਓ ਮੇਲਾ ਦੇਖਣ ਚਲੀਏ ਸਾਰੇ

.

ਸੜਕੋ ਸੜਕੀ ਦੇਖ ਹੱਟੀਆ ਲੱਗੀਆ

ਗੋਲ ਗੋਲ ਗੋਲੀਆ ਮੈਨੂੰ ਖੱਟੀਆ ਲੱਗੀਆ ।

ਚੱਲ ਚੱਲੀਏ ਘਰਾਂ ਨੂੰ ਮੇਲਾ ਮੁਕੱਣ ਲੱਗਾ ਏ

ਦੇਖ ਲਾ ਨੀ ਮਾਏ ਵੇਲਾ ਸੁਕੱਣ ਲੱਗਾ ਏ ।

ਖਾਲੀ ਵੀ ਕੋਈ ਨੀ

ਹੱਥ ਭਰੇ ਹੋਏ ਨੇ ਤੇ ਅੱਖਾਂ ਲਿਛਕਾਂ ਮਾਰੇ

ਆਓ ਨੀ ਸਖੀਓ ਮੇਲਾ ਦੇਖਣ ਚਲੀਏ ਸਾਰੇ ।

Title: ਮੇਲਾ || Mela || Punjabi poem