Jithe aakda da pallda bhari howe
Othe ruswayian ne taa jittna hi aa..!!
ਜਿੱਥੇ ਆਕੜਾਂ ਦਾ ਪੱਲੜਾ ਭਾਰੀ ਹੋਵੇ
ਉੱਥੇ ਰੁਸਵਾਈਆਂ ਨੇ ਤਾਂ ਜਿੱਤਣਾ ਹੀ ਆ..!!
Jithe aakda da pallda bhari howe
Othe ruswayian ne taa jittna hi aa..!!
ਜਿੱਥੇ ਆਕੜਾਂ ਦਾ ਪੱਲੜਾ ਭਾਰੀ ਹੋਵੇ
ਉੱਥੇ ਰੁਸਵਾਈਆਂ ਨੇ ਤਾਂ ਜਿੱਤਣਾ ਹੀ ਆ..!!
लिखता मैं किसान के लिए
मैं लिखता इंसान के लिए
नहीं लिखता धनवान के लिए
नहीं लिखता मैं भगवान के लिए
लिखता खेत खलियान के लिए
लिखता मैं किसान के लिए
नहीं लिखता उद्योगों के लिए
नहीं लिखता ऊँचे मकान के लिए
लिखता हूँ सड़कों के लिए
लिखता मैं इंसान के लिए
क़लम मेरी बदलाव बड़े नहीं लाई
नहीं उम्मीद इसकी मुझे
खेत खलियान में बीज ये बो दे
सड़क का एक गढ्ढा भर देती
ये काफ़ी इंसान के लिए
लिखता हूँ किसान के लिए
लिखता मैं इंसान के लिए
आशा नहीं मुझे जगत पढ़े
पर जगत का एक पथिक पढ़े
फिर लाए क्रांति इस समाज के लिए
इसलिए लिखता मैं दबे-कुचलों के लिए
पिछड़े भारत से ज़्यादा
भूखे भारत से डरता हूँ
फिर हरित क्रांति पर लिखता हूँ
फिर किसान पर लिखता हूँ
क्योंकि
लिखता मैं किसान के लिए
लिखता मै इंसान के लिए
तरुण चौधरी
ajh yaad puraniyaa fir aawan
dil da haal jo vich likhiyaa si
oh shabad mainu mere dil de kareeb lawan
mainu yaad aa
oh jaan si
par jaan ke v ajh oh anjaan c
ਅੱਜ ਯਾਦਾਂ ਪੁਰਾਣੀਆਂ ਫਿਰ ਆਵਣ
ਦਿਲ ਦਾ ਹਾਲ ਜੋ ਵਿੱਚ ਲਿਖਿਆ ਸੀ
ਉਹ ਸ਼ਬਦ ਮੈਨੂੰ ਮੇਰੇ ਦਿਲ ਦੇ ਕਰੀਬ ਲਾਵਣ
ਮੈਨੂੰ ਯਾਦ ਆ
ਉਹ ਜਾਨ ਸੀ
ਪਰ ਜਾਣ ਕੇ ਵੀ ਅੱਜ ਉਹ ਅਨਜਾਣ ਸੀ