
Ohnu dekhe bina bhawe kinne hi din langh gaye hon par akhan vich vasi tasveer ajhe v taazi di taazi pai

Ohnu dekhe bina bhawe kinne hi din langh gaye hon par akhan vich vasi tasveer ajhe v taazi di taazi pai
वो मेरे चर्चे गुफ्तगू के बहाने से सबसे करते हैं,
ये जान के भी हम इस बात से हर पल मरते हैं,
जिन अपनो को के लिए सीने में मोहब्बत थी,
उनके अब हम पास गुजरने से भी बहुत डरते हैं,
मुझे कैद करके कितना जीने दे सकोगे तुम भला,
देखो कितनी शिद्दत से हम मौत की दुआ पढ़ते हैं,
मेरी जान को गुनाहों से तौल कर क्या पा लोगे,
मेरे हर्फ़ के वजन से गुनाह अक्सर बदलते हैं ,
उर्दू का कोई शायर होता मैं लफ्ज़ संभाल लेता,
गोया अगर होते तो लफ्ज़ न गिरते, न इतना संभलते।
ज़िन्दगी के अंजान सफर में निकल के देखूंगा,
ये मौत का दरिया है तो चल के देखूंगा...
सवाल ये है कि रफ्तार किसकी कितनी है,
मैं हवाओं से आगे निकल कर देखूंगा...
इक मज़ाक अच्छा रहेगा चांद तारों से,
मैं आज शाम से पहले ढल कर देखूंगा...
रोशनी बाटने वालों पर क्या गुजरती है,
आज मैं इक चिराग़ की तरह जल कर देखूंगा...