Pal bhar aapko na sochu to
Dhadkane tarasne lagti hai
Aapko jo dekhlu to
Nam ankhein bhi hasne lagti hai…❤️❤️
पलभर आपको ना सोचूँ तो
धड़कने तरसने लगती है…
आपको जो देख लूं तो
नम आंखे भी हंसने लगती हैं…❤️❤️
Pal bhar aapko na sochu to
Dhadkane tarasne lagti hai
Aapko jo dekhlu to
Nam ankhein bhi hasne lagti hai…❤️❤️
पलभर आपको ना सोचूँ तो
धड़कने तरसने लगती है…
आपको जो देख लूं तो
नम आंखे भी हंसने लगती हैं…❤️❤️
Sabar milu hun vich kabar⚰️
Ma bhatkda riha dagar dagar
Dard to durr karu hun maut a
Jann da hun na manu rokk
Mera lai roai na ki sochn ga lok
Mann da tur Jan di khabar to rahi bakhabar
Sabar milu hun vich kabar
Manisha❤️Mann✍️
अकबर बीरबल की हाज़िर जवाबी के बडे कायल थे। एक दिन दरबार में खुश होकर उन्होंने बीरबल को कुछ पुरस्कार देने की घोषणा की। लेकिन बहुत दिन गुजरने के बाद भी बीरबल को पुरस्कार की प्राप्त नहीं हुई। बीरबल बडी ही उलझन में थे कि महाराज को याद दिलायें तो कैसे?
एक दिन महारजा अकबर यमुना नदी के किनारे शाम की सैर पर निकले। बीरबल उनके साथ था। अकबर ने वहाँ एक ऊँट को घुमते देखा। अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल बताओ, ऊँट की गर्दन मुडी क्यों होती है”?
बीरबल ने सोचा महाराज को उनका वादा याद दिलाने का यह सही समय है। उन्होंने जवाब दिया – “महाराज यह ऊँट किसी से वादा करके भूल गया है, जिसके कारण ऊँट की गर्दन मुड गयी है। महाराज, कहते हैं कि जो भी अपना वादा भूल जाता है तो भगवान उनकी गर्दन ऊँट की तरह मोड देता है। यह एक तरह की सजा है।”
तभी अकबर को ध्यान आता है कि वो भी तो बीरबल से किया अपना एक वादा भूल गये हैं। उन्होंने बीरबल से जल्दी से महल में चलने के लिये कहा। और महल में पहुँचते ही सबसे पहले बीरबल को पुरस्कार की धनराशी उसे सौंप दी, और बोले मेरी गर्दन तो ऊँट की तरह नहीं मुडेगी बीरबल। और यह कहकर अकबर अपनी हँसी नहीं रोक पाए।
और इस तरह बीरबल ने अपनी चतुराई से बिना माँगे अपना पुरस्कार राजा से प्राप्त किया।