bahuteyaa nu apna banaun di chahat nahi saanu
bas apne , apne bane rehn ehi bahut e
ਬਹੁਤਿਆ ਨੂੰ ਆਪਣਾ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਚਾਹਤ ਨਹੀ ਸਾਨੂੰ..
ਬਸ ਆਪਣੇ,ਆਪਣੇ ਬਣੇ ਰਹਿਣ ਏਹੀ ਬਹੁਤ ਏ..
bahuteyaa nu apna banaun di chahat nahi saanu
bas apne , apne bane rehn ehi bahut e
ਬਹੁਤਿਆ ਨੂੰ ਆਪਣਾ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਚਾਹਤ ਨਹੀ ਸਾਨੂੰ..
ਬਸ ਆਪਣੇ,ਆਪਣੇ ਬਣੇ ਰਹਿਣ ਏਹੀ ਬਹੁਤ ਏ..
रूप था उसका बहुत विशाल, राक्षस था वो बहुत भारी..
नाम था दशानन उसका, बुद्धि न जिसकी किसी से हारी..
हर कोई डरता था उससे, हो देव, दैत्य, चाहे नर-नारी..
प्रकोप था जिसका लोकों में, धरती कांपती थी सारी..
देखके ताकत को उसकी, भागे खड़े पैर बड़े बाल-धारी..
विशाल साम्राज्य पर उसके, भारी पड़ गई बस एक नारी..
घमंड को उसके चूर कर दिया, कहा समझ ना तू निर्बल नारी..
विधवंश का तेरे समय आ गया, ले आ गयी देख तेरी बारी..
लंका में बचेगा ना जीव कोई, मति जो गई तेरी मारी..
आराध्य से मेरे दूर कर दिया, भुगतेगी तेरी पीढी सारी..
रघुनंदन आए कर सागर पार, आए संग वानर गदा धारी..
एक-एक कर सबको मोक्ष दिया, सियाराम चरण लागी दुनिया सारी..
Hakim na labhe mainu koi aisa, jo kare ilaaz is fatt da
fatt lawaae asin aise dunghe ishq de, na zind katdi, na din
tainu kinjh samjawaan main
tere bin ik pal v ni katda
ਹਕੀਮ ਨਾ ਲੱਬੇ ਮੈਨੂੰ ਕੋਈ ਐਸਾ, ਜੋ ਕਰੇ ਇਲਾਜ਼ ਇਸ ਫੱਟ ਦਾ
ਫੱਟ ਲਾਵਾਏ ਅਸੀਂ ਐਸੇ ਡੂੰਘੇ ਇਸ਼ਕ ਦੇ, ਨਾ ਜ਼ਿੰਦ ਕੱਟਦੀ, ਨਾ ਦਿਨ
ਤੈਨੂੰ ਕਿੰਝ ਸਮਝਾਵਾਂ ਮੈ
ਤੇਰੇ ਬਿਨ ਇਕ ਪਲ ਵੀ ਨੀ ਕੱਟਦਾ