Har mohobbat nu manzil milni zaroori nahi,
Adhoore ishq da vi itehaas hai duniya te..
ਹਰ ਮੋਹੱਬਤ ਨੂੰ ਮੰਜਿਲ ਮਿਲਨੀ ਜਰੂਰੀ ਨਹੀਂ ,
ਅਧੂਰੇ ਇਸ਼ਕ ਦਾ ਵੀ ਇਤਿਹਾਸ ਹੈ ਦੁਨੀਆ ਤੇ।
Har mohobbat nu manzil milni zaroori nahi,
Adhoore ishq da vi itehaas hai duniya te..
ਹਰ ਮੋਹੱਬਤ ਨੂੰ ਮੰਜਿਲ ਮਿਲਨੀ ਜਰੂਰੀ ਨਹੀਂ ,
ਅਧੂਰੇ ਇਸ਼ਕ ਦਾ ਵੀ ਇਤਿਹਾਸ ਹੈ ਦੁਨੀਆ ਤੇ।
JO me haa, jado me tainu odaa di pasand hi nahi
taa fir me tere lai khud nu kyu badlaa?
ਜੋ ਮੈਂ ਹਾਂ , ਜਦੋਂ ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਓਦਾ ਦੀ ਪਸੰਦ ਈ ਨਈ
ਤਾਂ ਫਿਰ ਮੈਂ ਤੇਰੇ ਲਈ ਖੁਦ ਨੂੰ ਕਿੳ ਬਦਲਾ?
चलो किसी पुराने दौर की बात करते हैं,
कुछ अपनी सी और कुछ अपनों कि बात करते हैं…
बात उस वक्त की है जब मेरी मां मुझे दुलारा करती थी,
नज़रों से दुनिया की बचा कर मुझे संवारा करती थी,
गलती पर मेरी अकेले डांट कर पापा से छुपाया करती थी,
और पापा के मुझे डांटने पर पापा से बचाया करती थी…
मुझे कुछ होता तो वो भी कहाँ सोया करती थी,
देखा है मैंने,
वो रात भर बैठकर मेरे बाल संवारा करती थी,
घर से दूर आकर वो वक्त याद आता है,
दिन भर की थकान के बाद अब रात के खाने में, कहां मां के हाथ का स्वाद आता है,
मखमल की चादर भी अब नहीं रास आती है,
माँ की गोद में जब सिर हो उससे अच्छी नींद और कहाँ आती है…