Mein pucheya krishan bhagwan nu, meri mohabbat adhoori kyu likhi?
Oh vi hass ke ro paye, kehnde menu vi radha kdo mili !
ਮੈ ਪੁੱਛਿਆ ਕ੍ਰਿਸ਼ਨ ਭਗਵਾਨ ਨੂੰ,ਮੇਰੀ ਮੁਹੱਬਤ ਅਧੂਰੀ ਕਿਉ ਲਿਖੀ ?
ਉਹ ਵੀ ਹੱਸ ਕੇ ਰੋ ਪਏ,ਕਹਿੰਦੇ ਮੈਨੂੰ ਵੀ ਰਾਧਾ ਕਦੋ ਮਿਲੀ !
Mein pucheya krishan bhagwan nu, meri mohabbat adhoori kyu likhi?
Oh vi hass ke ro paye, kehnde menu vi radha kdo mili !
ਮੈ ਪੁੱਛਿਆ ਕ੍ਰਿਸ਼ਨ ਭਗਵਾਨ ਨੂੰ,ਮੇਰੀ ਮੁਹੱਬਤ ਅਧੂਰੀ ਕਿਉ ਲਿਖੀ ?
ਉਹ ਵੀ ਹੱਸ ਕੇ ਰੋ ਪਏ,ਕਹਿੰਦੇ ਮੈਨੂੰ ਵੀ ਰਾਧਾ ਕਦੋ ਮਿਲੀ !
तिश्नगी थी मुलाक़ात की,
उस से हाँ मैंने फिर बात की।
दुश्मनी मेरी अब मौत से,
ज़िंदगी हाथ पे हाथ की।
सादगी उसकी देखा हूँ मैं,
हाँ वो लड़की है देहात की।
तुमने वादा किया था कभी,
याद है बात वो रात की।
अब मैं कैसे कहूँ इश्क़ इसे,
बात जब आ गई ज़ात की।
मुझसे क्या दुश्मनी ऐ घटा,
क्यों मेरे घर पे बरसात की।
हमको मालिक ने जितना दिया,
सब ग़रीबों में ख़ैरात की।
तू कभी मिल तो मालूम हो,
क्या है औक़ात औक़ात की।
Unki samaj hamari samaj ko kabhi samaj hi naa payi vo is kadar nasamjh huye ki hamari paak mohabbat unhe na bhayi
उनकी समझ हमारी समझ को कभी समझ ही न पाई वो इस कदर नासमझ हुए कि हमारी पाक मोहब्बत उन्हें न भाई