ai chaand chala ja kyo aaya hai meree chaukhat par,
chhod gaye vo shakhs jisakee yaad me ham tujhe dekha karate the…
ऐ चांद चला जा क्यो आया है मेरी चौखट पर,
छोड गये वो शख्स जिसकी याद मे हम तुझे देखा करते थे…
ai chaand chala ja kyo aaya hai meree chaukhat par,
chhod gaye vo shakhs jisakee yaad me ham tujhe dekha karate the…
ऐ चांद चला जा क्यो आया है मेरी चौखट पर,
छोड गये वो शख्स जिसकी याद मे हम तुझे देखा करते थे…
Take up one thought. Make that one thought your life- – consider it, long for it, live on that thought. Let the
cerebrum, muscles, nerves, all aspects of your body, be brimming with that thought, and simply leave each and every other thought
alone. This is the way to progress.
बादशाह अकबर और बीरबल शिकार पर गए हुए थे। उनके साथ कुछ सैनिक तथा सेवक भी थे। शिकार से लौटते समय एक गांव से गुजरते हुए बादशाह अकबर ने उस गांव के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। उन्होंने इस बारे में बीरबल से कहा तो उसने जवाब दिया—”हुजूर, मैं तो इस गांव के बारे में कुछ नहीं जानता, किंतु इसी गांव के किसी बाशिन्दे से पूछकर बताता हूं।”
बीरबल ने एक आदमी को बुलाकर पूछा—”क्यों भई, इस गांव में सब ठीक-ठाक तो है न?”
उस आदमी ने बादशाह को पहचान लिया और बोला—”हुजूर आपके राज में कोई कमी कैसे हो सकती है।”
“तुम्हारा नाम क्या है?” बादशाह ने पूछा।
“गंगा”
“तुम्हारे पिता का नाम?”
“जमुना”
“और मां का नाम सरस्वती है?”
“हुजूर, नर्मदा।”
यह सुनकर बीरबल ने चुटकी ली और बोला—”हुजूर तुरन्त पीछे हट जाइए। यदि आपके पास नाव हो तभी आगे बढ़ें वरना नदियों के इस गांव में तो डूब जाने का खतरा है।”
यह सुनकर बादशाह अकबर हंसे बगैर न रह सके।