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Aisa koi lamha || Zikr || hindi shayari

Aesa koi lmha nhi h jisme tera zikr na ho..

Aesa koi pal nhi h jisme Teri fikr na ho..

Lakh mil jayenge tujhe chahne wale .

Pr humari jesi chaht kahi or na ho ..

Tu khush rhe h teri duniya tujhpe kbhi gamo ka dhoop na ho 

Title: Aisa koi lamha || Zikr || hindi shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Bahar se dikh rahe || Hindi 2 Liners

बाहर से दिख ने में कुछ पता नहीं चलता।

पानी के अंदर में धारा का प्रवाह बहता।

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वोट देते हैं लोगों, लेकिन विजेता नेता।  

नेता बनते है महान, सिर्फ आम ही रहे जाते हैं जनता।

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कवि बुद्धिजीवी और बुद्धिमान दोनों ही होते।

बहुत सारे बुद्धिजीवी बुद्धिमान नहीं हैं और बहुत बुद्धिमान भी बुद्धिजीवी हो नहीं पाते।

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कोविशिल्ड और कोवैक्सीन में सिर्फ नाम का अंतर।

सब इंसान एक हैं, अलग हैं व्यवहार।

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बारिश हो रही है, होने दो।

इंसान दुखी है, रोने दो।

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जिंदगी का मतलब हर वक्त पर दर्द को सम्हालना।

दवा और मलहम नियति की हात का खिलौना।

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दिल की बात रखो दिल में।

दूसरे जानकर मजा लेंगे और दिल जलेगी आग में।

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भूख जिसे चोरी करना सिखाया, वो बेकसूर है।

असली चोर तो वो है, जो ज्यादा खा के भी लालच करता है।

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कुत्ते के साथ मुँह मत लगाना।

गंदे के मुँह मत देखना।

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घने बादल हमेशा बारिश नहीं लाते।

कभी कभी ख़ुशी में भी गम नहीं जाते।

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अगर औरत की साथ प्यार हो तो वो रोमांस है।

लेकिन कोई मर्द का साथ प्यार हो ना ओफ्फेंस है।

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सब दोस्ती प्यार नहीं बनते।

सब रिश्ते रिश्तेदार भी नहीं लाते।

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पागलखाने में पागल नहीं रहते।

पागलपन सब के दिमाग में, मानसिक इसे ही कहते।

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पूजा जितना भी करो, मंत्र हज़ार बार पढ़ो, भगवान खुश नहीं।

लोकतंत्र की पुजारी ही असली पुजारी, सच यही।

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चादर में सोए रहो या बिस्तर पर, नींद होनी चाहिए।

दिल से प्यार करो या दिमाग से, आस्था होनी चाहिए।

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पहाड़ से नदी निकलती है और मिलती है सागर में।

पत्थर गतिरोधक, नदी जीवन की गति और समुद्र नियति है। 

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Title: Bahar se dikh rahe || Hindi 2 Liners


हटा ली आईने से धूल ए ग़ालिब || hindi shayari

हटा ली आइने से धूल ए ग़ालिब,
अब दामन मैला सा लगता है,
रूह तो नापाक थी ही,
अब आंगन भी मैला सा लगता है,
देखना ज़रूर के परिंदे भी छोड़ जायेंगे
बसेरा अपना उस दर से,
जिस दर पर मोहब्बत का मेला भी,
मैला सा लगता है...

Title: हटा ली आईने से धूल ए ग़ालिब || hindi shayari