मुर्शिद आज चराग़-ए-ग़म जलाऊँगा मैं
आज रात भर रात का दिल दुखाऊँगा मैं
आज किताब-ए-मुहब्बत के साथ साथ
तेरी निशानियों को भी आग लगाऊँगा मैं
ऐ सितमगर एहतियात-ए-हिजाब करना
अब फ़क़त तुझपे ही क़लम उठाऊँगा मैं
Enjoy Every Movement of life!
मुर्शिद आज चराग़-ए-ग़म जलाऊँगा मैं
आज रात भर रात का दिल दुखाऊँगा मैं
आज किताब-ए-मुहब्बत के साथ साथ
तेरी निशानियों को भी आग लगाऊँगा मैं
ऐ सितमगर एहतियात-ए-हिजाब करना
अब फ़क़त तुझपे ही क़लम उठाऊँगा मैं
Ik parinda umar bhar udeekda reh gya
te dujhe parinde nu bhora farak na pya
ਇਕ ਪਰਿੰਦਾ ਉਮਰ ਭਰ ਉਡੀਕਦਾ ਰਹਿ ਗਿਆ
ਤੇ ਦੂਜੇ ਪਰਿੰਦੇ ਨੂੰ ਭੋਰਾ ਫਰਕ ਨਾ ਪਿਆ
