मुर्शिद आज चराग़-ए-ग़म जलाऊँगा मैं
आज रात भर रात का दिल दुखाऊँगा मैं
आज किताब-ए-मुहब्बत के साथ साथ
तेरी निशानियों को भी आग लगाऊँगा मैं
ऐ सितमगर एहतियात-ए-हिजाब करना
अब फ़क़त तुझपे ही क़लम उठाऊँगा मैं
Enjoy Every Movement of life!
मुर्शिद आज चराग़-ए-ग़म जलाऊँगा मैं
आज रात भर रात का दिल दुखाऊँगा मैं
आज किताब-ए-मुहब्बत के साथ साथ
तेरी निशानियों को भी आग लगाऊँगा मैं
ऐ सितमगर एहतियात-ए-हिजाब करना
अब फ़क़त तुझपे ही क़लम उठाऊँगा मैं
Kine bchaya kine kita,
Barbaad likha
Mar k v mai,
Qabar apni te abaad likha
Mar k v mai,
Qabar apni te abaad likha
हमने तो चारो तरफ पढ़ाई का माहौल बनाया है,
लेकिन फिर भी एग्जाम में अंडा ही आया है,
हम तो यूँ ही चल देते हैं बिना मुंह धोये ही एग्जाम में,
साले दोस्त कहते हैं ये तो बहुत पढ़के आया है।