मुर्शिद आज चराग़-ए-ग़म जलाऊँगा मैं
आज रात भर रात का दिल दुखाऊँगा मैं
आज किताब-ए-मुहब्बत के साथ साथ
तेरी निशानियों को भी आग लगाऊँगा मैं
ऐ सितमगर एहतियात-ए-हिजाब करना
अब फ़क़त तुझपे ही क़लम उठाऊँगा मैं
मुर्शिद आज चराग़-ए-ग़म जलाऊँगा मैं
आज रात भर रात का दिल दुखाऊँगा मैं
आज किताब-ए-मुहब्बत के साथ साथ
तेरी निशानियों को भी आग लगाऊँगा मैं
ऐ सितमगर एहतियात-ए-हिजाब करना
अब फ़क़त तुझपे ही क़लम उठाऊँगा मैं
Ki khateyaa ve asi pyaar karke
akhaan tere naal yaara ve me chaar karke
tainu diti e jubaan aakhri saah tak karunga pyaar
preet bhawe bhulegi tu ko ikraar karke
ਕੀ ਖੱਟਿਆ ਵੇ ਅਸੀ ਪਿਆਰ ਕਰਕੇ
ਅੱਖਾਂ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਯਾਰਾਂ ਵੇ ਮੈਂ ਚਾਰ ਕਰਕੇ
ਤੈਨੂੰ ਦਿੱਤੀ ਏ ਜੁਬਾਨ ਆਖਰੀ ਸਾਹ ਤੱਕ ਕਰੂਗਾ ਪਿਆਰ
ਪ੍ਰੀਤ ਭਾਵੇਂ ਭੁੱਲਗੀ ਤੂੰ ਕੌਲ ਇਕਰਾਰ ਕਰਕੇ
ਭਾਈ ਰੂਪਾ
