मुर्शिद आज चराग़-ए-ग़म जलाऊँगा मैं
आज रात भर रात का दिल दुखाऊँगा मैं
आज किताब-ए-मुहब्बत के साथ साथ
तेरी निशानियों को भी आग लगाऊँगा मैं
ऐ सितमगर एहतियात-ए-हिजाब करना
अब फ़क़त तुझपे ही क़लम उठाऊँगा मैं
मुर्शिद आज चराग़-ए-ग़म जलाऊँगा मैं
आज रात भर रात का दिल दुखाऊँगा मैं
आज किताब-ए-मुहब्बत के साथ साथ
तेरी निशानियों को भी आग लगाऊँगा मैं
ऐ सितमगर एहतियात-ए-हिजाब करना
अब फ़क़त तुझपे ही क़लम उठाऊँगा मैं
Bhulne ni kade pal jo tere naa bataye
na chahunde hoye v sajjna supne tere hi aaye
na reha vas saaha te jis din de ne tere naal nain mlaye
ਭੁੱਲਣੇ ਨੀ ਕਦੇ ਪਲ ਜੋ ਤੇਰੇ ਨਾਂ ਬਤਾਏ
ਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋਏ ਵੀ ਸੱਜਣਾਂ ਸੁਪਨੇ ਤੇਰੇ ਹੀ ਆਏ
ਨਾ ਰਿਹਾ ਵੱਸ ਸਾਹਾ ਤੇ ਜਿਸ ਦਿਨ ਦੇ ਨੇ ਤੇਰੇ ਨਾ ਨੈਣ ਮਲਾਏ
