मुर्शिद आज चराग़-ए-ग़म जलाऊँगा मैं
आज रात भर रात का दिल दुखाऊँगा मैं
आज किताब-ए-मुहब्बत के साथ साथ
तेरी निशानियों को भी आग लगाऊँगा मैं
ऐ सितमगर एहतियात-ए-हिजाब करना
अब फ़क़त तुझपे ही क़लम उठाऊँगा मैं
मुर्शिद आज चराग़-ए-ग़म जलाऊँगा मैं
आज रात भर रात का दिल दुखाऊँगा मैं
आज किताब-ए-मुहब्बत के साथ साथ
तेरी निशानियों को भी आग लगाऊँगा मैं
ऐ सितमगर एहतियात-ए-हिजाब करना
अब फ़क़त तुझपे ही क़लम उठाऊँगा मैं

प्रेम होना चाहिए सहज, सरल
जो आपको खुद के साथ
बहाव ले जाऐ…कहीं दूर बहुत दूर
जहाँ जरूरतों का जिक्र ही ना हो
सब कुछ एक एहसास में दफ़न हो जाए
प्रेम में कोशिश होनी चाहिए तो बस
कभी वो रूठ जाए तो उसे मनाने की कोशिश…
कभी वो उदास हो तो उसे हंसाने की कोशिश…
प्रेम से बिगड़ी बात बनाने की कोशिश..
वो बेवजह तेरी चुप्पी जानने की कोशिश….
तेरा हाथ थाम कर मुश्किल राहों मैं तुझे समझाने की कोशिश….
इतना प्रेम करने के बाद भी तुझे न पाने की कोशिश….
तुम्हारा मेरे साथ रहना जरुरी नहीं है मेरे लिए तुम्हारा खुश और आज़ाद रहना जरुरी है ❤️🍂