मैं चांद तारे तोड़ के तो नहीं ला सकता
पर आपके लिए काजल ज़रूर ले आऊंगा ,
वादा नहीं करता की कभी रोने नहीं दूंगा,
पर वादा करता हु उस समय अकेला नहीं छोड़ूंगा ❤️
मैं चांद तारे तोड़ के तो नहीं ला सकता
पर आपके लिए काजल ज़रूर ले आऊंगा ,
वादा नहीं करता की कभी रोने नहीं दूंगा,
पर वादा करता हु उस समय अकेला नहीं छोड़ूंगा ❤️
Ke naraz rkhte h hr waqt hum apko
• Mante h ap jitne smjhdar nhi hai.
• bs itna kehna cahte h meri jaan ke glt mt smjha kijiye humari baat ko.
• Maaf kr diya kro kuch is trah hume
• jaise ek maa apne bache ki hr glti ko maaf kr deti h.
• M. Bhi toh apka bacha hun.
• Jaan booj kr nhi krta mai gltiya
• Bs thoda akl ka kcha hun.
• Sry meri jaan us hr glti ke liye jo apko dukh deti h.
• Insaan mai bhi glt nhi hun bs is zalim duniya m. Dil se sacha hun.
• Kbhi kbhi jane anjane m. Bhul ho jati hai.
• Lekin dil se m. Bht acha hun.
सर में सौदा भी नहीं दिल में तमन्ना भी नहीं
लेकिन इस तर्क-ए-मोहब्बत का भरोसा भी नहीं
दिल की गिनती न यगानों में न बेगानों में
लेकिन उस जल्वा-गह-ए-नाज़ से उठता भी नहीं
मेहरबानी को मोहब्बत नहीं कहते ऐ दोस्त
आह अब मुझ से तिरी रंजिश-ए-बेजा भी नहीं
एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं
आज ग़फ़लत भी उन आँखों में है पहले से सिवा
आज ही ख़ातिर-ए-बीमार शकेबा भी नहीं
बात ये है कि सुकून-ए-दिल-ए-वहशी का मक़ाम
कुंज-ए-ज़िंदाँ भी नहीं वुसअ’त-ए-सहरा भी नहीं
अरे सय्याद हमीं गुल हैं हमीं बुलबुल हैं
तू ने कुछ आह सुना भी नहीं देखा भी नहीं
आह ये मजमा-ए-अहबाब ये बज़्म-ए-ख़ामोश
आज महफ़िल में ‘फ़िराक़’-ए-सुख़न-आरा भी नहीं
ये भी सच है कि मोहब्बत पे नहीं मैं मजबूर
ये भी सच है कि तिरा हुस्न कुछ ऐसा भी नहीं
यूँ तो हंगामे उठाते नहीं दीवाना-ए-इश्क़
मगर ऐ दोस्त कुछ ऐसों का ठिकाना भी नहीं
फ़ितरत-ए-हुस्न तो मा’लूम है तुझ को हमदम
चारा ही क्या है ब-जुज़ सब्र सो होता भी नहीं
मुँह से हम अपने बुरा तो नहीं कहते कि ‘फ़िराक़’
है तिरा दोस्त मगर आदमी अच्छा भी नहीं