
किसान कविता
बूँद बूँद को तरसे जीवन,
बूँद से तड़पा हर किसान
बूँद नही हैं कही यहाँ पर
गद्दी चढ़े बैठे हैवान.
बूँद मिली तो हो वरदान
बूँद से तरसा हैं किसान
बूँद नही तो इस बादल में
देश का डूबा है अभिमान
बूँद से प्यासा हर किसान
बूँद सरकारों का फरमान
बूँद की राजनीति पर देखों
डूब रहा है हर इंसान.
देव चौधरी
Sada ishq mukammal tere layi 🥰
Asi apna aap gawa leya 🙃
Bhawein sab kuj khoyeya zindagi vich 💯
Tenu mil ke sab kuj pa leya ❤️
ਸਾਡਾ ਇਸ਼ਕ ਮੁਕੰਮਲ ਤੇਰੇ ਲਈ,🥰
ਅਸੀਂ ਆਪਣਾ ਆਪ ਗਵਾ ਲਿਆ,🙃
ਭਾਵੇਂ ਸਭ ਕੁਝ ਖੋਇਆ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਵਿੱਚ,💯
ਤੈਨੂੰ ਮਿਲ ਕੇ ਸਭ ਕੁੱਝ ਪਾ ਲਿਆ।❤️