Zikar se nhi
fikar se pata chalta hai ki aapna kaun hai…❣️
ज़िक्र से नहीं
फिक्र से पता चलता है कि अपना कौन है…❣️
Zikar se nhi
fikar se pata chalta hai ki aapna kaun hai…❣️
ज़िक्र से नहीं
फिक्र से पता चलता है कि अपना कौन है…❣️
ज़िन्दगी के अंजान सफर में निकल के देखूंगा,
ये मौत का दरिया है तो चल के देखूंगा...
सवाल ये है कि रफ्तार किसकी कितनी है,
मैं हवाओं से आगे निकल कर देखूंगा...
इक मज़ाक अच्छा रहेगा चांद तारों से,
मैं आज शाम से पहले ढल कर देखूंगा...
रोशनी बाटने वालों पर क्या गुजरती है,
आज मैं इक चिराग़ की तरह जल कर देखूंगा...
Sanson ke rukne ki kya zaroorat thi “roop”
Maarne ki liye to unki ek nazar hi kaafi thi..!!
सांसों के रुकने की क्या ज़रूरत थी “रूप”
मारने के लिए तो उनकी एक नज़र ही काफी थी..!!