Na me ohnu pa sakeya
te na me rabb nu pa sakeya
is zindagi di bheed vich
me apne aap nu hi na paa sakeyaa
ਨਾ ਮੈਂ ਉਹਨੂੰ ਪਾ ਸਕਿਆ
ਤੇ ਨਾ ਮੈਂ ਰੱਬ ਨੂੰ ਪਾ ਸਕਿਆ
ਇਸ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੀ ਭੀੜ ਵਿੱਚ
ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਹੀ ਨਾ ਪਾ ਸਕਿਆ
Na me ohnu pa sakeya
te na me rabb nu pa sakeya
is zindagi di bheed vich
me apne aap nu hi na paa sakeyaa
ਨਾ ਮੈਂ ਉਹਨੂੰ ਪਾ ਸਕਿਆ
ਤੇ ਨਾ ਮੈਂ ਰੱਬ ਨੂੰ ਪਾ ਸਕਿਆ
ਇਸ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੀ ਭੀੜ ਵਿੱਚ
ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਹੀ ਨਾ ਪਾ ਸਕਿਆ
अकबर बादशाह को मजाक करने की आदत थी। एक दिन उन्होंने नगर के सेठों से कहा-
“आज से तुम लोगों को पहरेदारी करनी पड़ेगी।”
सुनकर सेठ घबरा गए और बीरबल के पास पहुँचकर अपनी फरियाद रखी।
बीरबल ने उन्हें हिम्मत बँधायी,
“तुम सब अपनी पगड़ियों को पैर में और पायजामों को सिर पर लपेटकर रात्रि के समय में नगर में चिल्ला-चिल्लाकर कहते फिरो, अब तो आन पड़ी है।”
उधर बादशाह भी भेष बदलकर नगर में गश्त लगाने निकले। सेठों का यह निराला स्वांग देखकर बादशाह पहले तो हँसे, फिर बोले-“यह सब क्या है ?”
सेठों के मुखिया ने कहा-
“जहाँपनाह, हम सेठ जन्म से गुड़ और तेल बेचने का काम सीखकर आए हैं, भला पहरेदीर क्या कर पाएँगे, अगर इतना ही जानते होते तो लोग हमें बनिया कहकर क्यों पुकारते?”
बादशाह अकबर बीरबल की चाल समझ गए और अपना हुक्म वापस ले लिया।