Aram jeha de janda e mere dil de dukhde nu
Sajjna ve ki aakha tere hassde mukhde nu❤️..!!
ਅਰਾਮ ਜਿਹਾ ਦੇ ਜਾਂਦਾ ਏ ਮੇਰੇ ਦਿਲ ਦੇ ਦੁੱਖੜੇ ਨੂੰ
ਸੱਜਣਾ ਵੇ ਕੀ ਆਖਾਂ ਤੇਰੇ ਹੱਸਦੇ ਮੁੱਖੜੇ ਨੂੰ❤️..!!
Aram jeha de janda e mere dil de dukhde nu
Sajjna ve ki aakha tere hassde mukhde nu❤️..!!
ਅਰਾਮ ਜਿਹਾ ਦੇ ਜਾਂਦਾ ਏ ਮੇਰੇ ਦਿਲ ਦੇ ਦੁੱਖੜੇ ਨੂੰ
ਸੱਜਣਾ ਵੇ ਕੀ ਆਖਾਂ ਤੇਰੇ ਹੱਸਦੇ ਮੁੱਖੜੇ ਨੂੰ❤️..!!
सर में सौदा भी नहीं दिल में तमन्ना भी नहीं
लेकिन इस तर्क-ए-मोहब्बत का भरोसा भी नहीं
दिल की गिनती न यगानों में न बेगानों में
लेकिन उस जल्वा-गह-ए-नाज़ से उठता भी नहीं
मेहरबानी को मोहब्बत नहीं कहते ऐ दोस्त
आह अब मुझ से तिरी रंजिश-ए-बेजा भी नहीं
एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं
आज ग़फ़लत भी उन आँखों में है पहले से सिवा
आज ही ख़ातिर-ए-बीमार शकेबा भी नहीं
बात ये है कि सुकून-ए-दिल-ए-वहशी का मक़ाम
कुंज-ए-ज़िंदाँ भी नहीं वुसअ’त-ए-सहरा भी नहीं
अरे सय्याद हमीं गुल हैं हमीं बुलबुल हैं
तू ने कुछ आह सुना भी नहीं देखा भी नहीं
आह ये मजमा-ए-अहबाब ये बज़्म-ए-ख़ामोश
आज महफ़िल में ‘फ़िराक़’-ए-सुख़न-आरा भी नहीं
ये भी सच है कि मोहब्बत पे नहीं मैं मजबूर
ये भी सच है कि तिरा हुस्न कुछ ऐसा भी नहीं
यूँ तो हंगामे उठाते नहीं दीवाना-ए-इश्क़
मगर ऐ दोस्त कुछ ऐसों का ठिकाना भी नहीं
फ़ितरत-ए-हुस्न तो मा’लूम है तुझ को हमदम
चारा ही क्या है ब-जुज़ सब्र सो होता भी नहीं
मुँह से हम अपने बुरा तो नहीं कहते कि ‘फ़िराक़’
है तिरा दोस्त मगर आदमी अच्छा भी नहीं
Bhej da haan me sunehe
roj tareyaan de hathi
pata hunda tainu
je kade tu v raati uth ke
tareyaan nu takeyaa hunda
ਭੇਜ਼ ਦਾ ਹਾਂ ਮੈਂ ਸੁਨੇਹੇ
ਰੋਜ਼ ਤਾਰਿਆ ਹੱਥੀ
ਪਤਾ ਹੁੰਦਾ ਤੈਨੂੰ ਵੀ
ਜੇ ਕਦੇ ਤੂੰ ਵੀ ਰਾਤੀਂ ਉਠ ਕੇ
ਤਾਰਿਆਂ ਨੂੰ ਤੱਕਿਆ ਹੁੰਦਾ