Asi dukhi hoke v khush hn te tun khush hoke v dukhi hon da natak krda ey
Hasseya kar jinna hass skda hai kyunki aaj kal koi krma vala hi hsda ey
Asi dukhi hoke v khush hn te tun khush hoke v dukhi hon da natak krda ey
Hasseya kar jinna hass skda hai kyunki aaj kal koi krma vala hi hsda ey
गर्मियों से मुग्ध थी धरती
पर बारिश की बून्दें पड़ते ही
तुम बुदबुदाईं —
बारिश कितनी ख़ूबसूरत है !क्या तुम्हारा मन
मिट्टी से भी ज़्यादा ठण्ड को महसूस करता है
तभी तो बारिश में विलीन हो गए
छलकते हुए आनन्द को स्वीकार न कर
तुमने आहिस्ता से कहा —
बारिश कितनी ख़ूबसूरत है !तुम्हारे आँगन में
बून्द-बून्द में
अपने अनगिनत चान्दी के तारों में
सँगीत की सृष्टि कर
बारिश
जिप्सी लड़की की तरह नाचती है
तुम्हारी आँखों में ख़ुशी है, आह्लाद है
और शब्दों में बच्चों-सी पवित्रता
बारिश कितनी ख़ूबसूरत है !अपने इर्द-गिर्द की चीज़ों
से अनजान
तुम यहाँ बैठी हो
नदी तुम्हारी स्मृतियों में ज़िन्दा हैअपनी सहेलियों के सँग
धीरे से घाघरा उठाकर
तुम नदी पार करती हो
अचानक बारिश गिरती है
लहरें चान्दी के नुपूर पहन नाचती हैंबारिश में भीगकर हर्षोन्माद में
हंसते हुए तुम
नदी तट पर पहुँचती होबारिश में भीगे आँवले के फूल
पगडण्डी पर तुम्हारा स्वागत करते हैं
तुम्हारे सामने
केवल बारिश है, पगडण्डी है
और फूलों से भरे खेत हैं !मेरी उपस्थिति को भूलते हुए
तुमने मृदुल आवाज़ में कहा —
बारिश कितनी ख़ूबसूरत है !फिर तुम्हें देखकर
मैंने उससे भी मृदुल आवाज़ में कहा —
तुम भी तो कितनी ख़ूबसूरत हो !
Jis di pagg naal diyan mein chunniya ranga skaa
Jisde chehre nu dekh mein apna chehra swar skaa
Jisda mukhda mere lyi sheeshaa ban jaye
Jisde vall dekh mein khud nu nihar skaa
Ni maye!! esa var chahundi haan..!!
Jis de pairan vich menu jannat mil jawe
Jisnu dekh meri rooh khil jawe
Jisnu labh k lgge menu labb gyi e zindgi
Jisde agge haar eh dil jawe
Ni maaye !! Esa var chahundi aa..!!
Mera hon da Jisdi akhan ch groor dekh skaa
Jis vich mein prmatma jeha noor dekh skaa
Jisnu pa k lgge mein paya e rabb
Prithvi de kan kan ch usnu zroor dekh skaa
Ni maaye !! Esa var chahundi haan..!!
ਜਿਸ ਦੀ ਪੱਗ ਨਾਲ ਦੀਆਂ ਮੈਂ ਚੁੰਨੀਆਂ ਰੰਗਾ ਸਕਾਂ
ਜਿਸਦੇ ਚਿਹਰੇ ਨੂੰ ਦੇਖ ਮੈਂ ਆਪਣਾ ਚਿਹਰਾ ਸਵਾਰ ਸਕਾਂ
ਜਿਸਦਾ ਮੁਖੜਾ ਮੇਰੇ ਲਈ ਸ਼ੀਸ਼ਾ ਬਣ ਜਾਏ
ਜਿਸਦੇ ਵੱਲ ਦੇਖ ਮੈਂ ਖੁੱਦ ਨੂੰ ਨਿਹਾਰ ਸਕਾਂ
ਨੀਂ ਮਾਏਂ !! ਐਸਾ ਵਰ ਚਾਹੁੰਦੀ ਹਾਂ..!!
ਜਿਸਦੇ ਪੈਰਾਂ ਵਿੱਚ ਮੈਨੂੰ ਜੰਨਤ ਮਿਲ ਜਾਵੇ
ਜਿਸਨੂੰ ਦੇਖ ਮੇਰੀ ਰੂਹ ਖਿਲ ਜਾਵੇ
ਜਿਸਨੂੰ ਲੱਭ ਕੇ ਲੱਗੇ ਮੈਂਨੂੰ ਲੱਭ ਗਈ ਏ ਜ਼ਿੰਦਗੀ
ਜਿਸਦੇ ਅੱਗੇ ਹਾਰ ਇਹ ਦਿਲ ਜਾਵੇ
ਨੀਂ ਮਾਏਂ !! ਐਸਾ ਵਰ ਚਾਹੁੰਦੀ ਹਾਂ..!!
ਮੇਰਾ ਹੋਣ ਦਾ ਜਿਸਦੀਆਂ ਅੱਖਾਂ ‘ਚ ਗਰੂਰ ਦੇਖ ਸਕਾਂ
ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਮੈਂ ਪਰਮਾਤਮਾ ਜਿਹਾ ਨੂਰ ਦੇਖ ਸਕਾਂ
ਜਿਸਨੂੰ ਪਾ ਕੇ ਲੱਗੇ ਮੈਂ ਪਾਇਆ ਏ ਰੱਬ
ਪ੍ਰਿਥਵੀ ਦੇ ਕਣ ਕਣ ‘ਚ ਉਸਨੂੰ ਜ਼ਰੂਰ ਦੇਖ ਸਕਾਂ
ਨੀਂ ਮਾਏਂ !! ਐਸਾ ਵਰ ਚਾਹੁੰਦੀ ਹਾਂ..!!