Tu Rakh le sambh k pyar apne nu
asin tanhayiaan naal g launa sikh leya
ਤੂੰ ਰੱਖ ਲੈ ਸਾਂਭ ਕੇ ਪਿਆਰ ਆਪਣੇ ਨੂੰ
ਅਸੀਂ ਤਨਹਾਈਆਂ ਨਾਲ ਜੀ ਲਾਉਣਾ ਸਿਖ ਲਿਆ
Tu Rakh le sambh k pyar apne nu
asin tanhayiaan naal g launa sikh leya
ਤੂੰ ਰੱਖ ਲੈ ਸਾਂਭ ਕੇ ਪਿਆਰ ਆਪਣੇ ਨੂੰ
ਅਸੀਂ ਤਨਹਾਈਆਂ ਨਾਲ ਜੀ ਲਾਉਣਾ ਸਿਖ ਲਿਆ
दोस्त वो है जो थाम के रखता है हाथ
परवाह नहीं उसको कौन है तुम्हारे साथ
उसकी आखों में चमक दिखती है
जब होता है तुम्हारे साथ
गुजर जाता है वक़्त मिनटों में
जब करते हैं उससे बात
दोस्त वो हैं जो सामने आ जाये गर
खुद बयाँ हो जाते हैं दिल के हालत
कुछ सोचना नहीं पड़ता
जब होती है उससे बात
दोस्त वो है जो बिन कहे समझ लेता है हर बात
बस हम छिपा नहीं सकते उससे कोई भी राज
कर देता है हैरान तब और भी
जब मरहलों में बन जाता है ढाल
अपने सारे दर्द ग़म भुला कर
साथ हँसता है सारी रात
उसे कुछ भी नहीं चाहिए तुमसे बस
कुछ पल तुम्हारे साथ का है वह मोहताज़
दोस्त वो है जिससे दोस्ती निभानी नहीं पड़ती
जिसे कोई भी बात समझानी नहीं पड़ती
रूठ भी जाए तो भी नहीं करता नज़रन्दाज़
इसलिए ये रिश्ता होता है हर रिश्ते से ख़ास
कभी वो माँ की तरह समझाता है
तो कभी पिता की तरह डांटता है
कभी- कभी बहन बन कर सताता है
तो कभी भाई की तरह रुलाता है
कभी एक आफ़ताब बन होंसला बढ़ाता है
हमें ग़म और खुशियों से परे ले जाता है
जिसके पास है ऐसा दोस्त
वही मुकम्मल है इस जहाँ में
वही है हयात का सरताज
“The entire mystery of a successful life is to discover how is one’s destiny to respond, and afterward get it done.”
“If you’re going through a lot of hardship continue onward.”