
Fikran jagg diyan nu fizool rakhi..!!
Je pyar pauna fer gurha pawi
Te nibhawan da vi asool rakhi..!!

ये किसने जेल में लाया खाना हाय अल्लाह,
मुजरिम का भी है कोई दीवाना हाय अल्लाह।
ये मज्मा भी मेरे रोने पे बजाता है ताली,
किसको सुनाएं अपना अफ़साना हाय अल्लाह।
अब क्या कि जुर्म किसने की है क़ुसुर है किसका,
अब तो लगा है मुझपर जुर्माना हाय अल्लाह।
मेरी नज़र क्या उस पे है सबकी नज़र मुझ पे है,
पूरा शहर है उसका दीवाना हाय अल्लाह।
वो मुझसे मिलता है रोज़ाना मगर नतीजा ये,
देखो तो लगता है वो बेगाना हाय अल्लाह।
जब भी किसी ने पूछा है धोखा कब मिला फिर तो,
बचपन का याद आए याराना हाय अल्लाह।
शिकवा नहीं है उससे बस दुख ‘अमीम’ इतना है,
क्यों मेरा लौट आया नज़राना हाय अल्लाह
ਕਿਸੇ ਕੋਣੇ ਚ ਬਹਿ ਕੇ ਆਪਣੇ ਮਨ ਨੂੰ ਸਮਝਾ ਲੈਣੀ ਆ ਮੈ
ਤੇਰੀ ਫੋਟੋ ਵੱਲ ਵੇਖ ਕੇ ਉਹਨੂੰ ਘੁੱਟ ਸਿਨੇ ਨਾਲ ਲਾ ਲੈਣੀ ਆ ਮੈ
ਪਤਾ ਐ ਬਾਪੂ ਹੁਣ ਤੂੰ ਵਾਪਿਸ ਮੁੜ ਨਾ ਨੀ
ਕੱਲੀ ਬੈਠ ਕੇ ਇਹ ਗੱਲ ਵਿਚਾਰ ਲੈਣੀ ਆ ਮੈ
ਜਦ ਤੂੰ ਨੀ ਰਿਹਾ ਬਾਪੂ ਤਾ ਫਿਰ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਕਿਸ ਕੰਮ ਦੀ
ਹੁਣ ਤਾ ਬਸ ਮੌਤ ਨੂੰ ਹੀ ਪੁਕਾਰ ਲੈਣੀ ਆ ਮੈ….