
samaj sakta hai
bina dimag wale log nahi

हर वक्त एक अंजान साया सा, मेरे पास घूमता रहता है..
मेरे दिल से जुडा है वो शायद, मेरी रूह चूमता रहता है..
बताता नहीं है मुझको कुछ, और ना मुझसे कुछ कहता है..
मेरी मर्जी हो या ना हो मगर, शागिर्द बना वो रहता है..
दिन और रात वो बस मेरे, आगोश में पलता रहता है..
मैं चाहुं या फिर ना चाहुं, मेरे साथ वो चलता रहता है..
हर खुशी बांटता है मेरी, हर गम मेरे संग सेहता है..
आखिर साया है ये किसका, ये सवाल जहन में रहता है..
Jo asi dujeya nu dewange ohi
Wapas sade kol aawega bhawein
Oh izzat howe sanmaan howe
Jaa fir dhokha🙌
ਜੋ ਅਸੀਂ ਦੂਜਿਆਂ ਨੂੰ ਦੇਵਾਂਗੇ ਉਹੀ
ਵਾਪਸ ਸਾਡੇ ਕੋਲ ਆਵੇਗਾ ਭਾਵੇਂ,
ਉਹ ਇੱਜ਼ਤ ਹੋਵੇ ਸਨਮਾਨ ਹੋਵੇ
ਜਾਂ ਫਿਰ ਧੋਖਾ 🙌