
samaj sakta hai
bina dimag wale log nahi

मयकदे में बैठ कर जाम इश्क़ के पी रहा हूं,
मुझे ना जगाना यारों मै ख़्वाबों में जी रहा हूं…
मोहब्बत भी कि, वफा भी रास आई,
थामा जब हाथ उसका तो जैसे ज़िन्दगी पास आई…
बंद आंखों में एहसासों को जी रहा हूं,
मुझे ना जगाना यारों मै ख़्वाबों में जी रहा हूं…
इश्क़ दिल से किया कलम से दास्तां लिखा,
मै ज़मीन पर सही उसे आसमां लिखा,
कुछ बिखरे लम्हों को पलकों के धागों से सी रहा हूं,
मुझे ना जगाना यारों मै ख़्वाबों में जी रहा हूं…
नजदीकियों का डर है, थोड़ा गुमराह हूं,
ना जाने धड़कने क्यों तेज़ है, मै भी तो हमराह हूं,
लग रहा है मै भवरा बन फूलों से खुशबू पी रहा हूं,
मुझे ना जगाना यारों मै ख़्वाबों में जी रहा हूं…
सुबह कुछ दस्तक दी शाम को वो लम्हें चल दिए,
वक्त की बंदिशें थी हम भी उनके पीछे चल दिए…
अगली सुबह के इंतज़ार में वक्त का दरिया पी रहा हूं,
मुझे ना जगाना यारों अब मै ख़्वाबों को जी रहा हूं…
Hun hnju hi mere sathi ne
Ditta dard vi tera hun vass nahi hona..!!
Teri mohobbat ne is kadar tod ditta e
Hun hassna vi chahiye ta hass nahi hona..!!
ਹੁਣ ਹੰਝੂ ਹੀ ਮੇਰੇ ਸਾਥੀ ਨੇ
ਦਿੱਤਾ ਦਰਦ ਵੀ ਤੇਰਾ ਹੁਣ ਵੱਸ ਨਹੀਂ ਹੋਣਾ..!!
ਤੇਰੀ ਮੋਹੁੱਬਤ ਨੇ ਇਸ ਕਦਰ ਤੋੜ ਦਿੱਤਾ ਏ
ਹੁਣ ਹੱਸਣਾ ਵੀ ਚਾਹੀਏ ਤਾਂ ਹੱਸ ਨਹੀਂ ਹੋਣਾ..!!