बातों ही बातों में उसकी
एक बात निकल जाती है
खबर नहीं कि कब उसकी
याद में रात निकल जाती है
मेरी मोहब्बत कहने से पहले
उसकी औकात निकल जाती है
बातों ही बातों में उसकी
एक बात निकल जाती है
खबर नहीं कि कब उसकी
याद में रात निकल जाती है
मेरी मोहब्बत कहने से पहले
उसकी औकात निकल जाती है
Khushiyan dard te hanju sb ikko jehe lagde ne
Sab bhull janda e anokhe raahan ch pai ke..!!
Koi puche je menu eh hunda e ki
Biyan kara ishq nu mein naam tera le ke..!!
ਖੁਸ਼ੀਆਂ ਦਰਦ ਤੇ ਹੰਝੂ ਸਭ ਇੱਕੋ ਜਿਹੇ ਲੱਗਦੇ ਨੇ
ਸਭ ਭੁੱਲ ਜਾਂਦਾ ਏ ਅਨੋਖੇ ਰਾਹਾਂ ‘ਚ ਪੈ ਕੇ..!!
ਕੋਈ ਪੁੱਛੇ ਜੇ ਮੈਨੂੰ ਇਹ ਹੁੰਦਾ ਏ ਕੀ
ਬਿਆਨ ਕਰਾਂ ਇਸ਼ਕ ਨੂੰ ਮੈਂ ਨਾਮ ਤੇਰਾ ਲੈ ਕੇ..!!
दिवाली पर पापा को बोनस मिलता था तनख्वाह थोड़ी ज्यादा आती थी सबको मालूम था दिवाली पर भी नए कपड़े लेने के लिए पैसे गिनकर मिलते थे कोई अगर बीमार हो जाए तो वो नए कपड़े भी कैंसल हो जाते थे। बचपन से ही एडजस्ट करने की आदत लग जाती है ये आदत अच्छी हो होती है पर कभी कभी बुरी भी होती है। धीरे धीरे बड़े हुए तो पता था मम्मी पापा को कुछ बनकर दिखाना है ये ख्वाब साथ लेकर चला पर बाहर निकले घर से तो ये पता चला कि जो मेरा ख्वाब है वही सबका भी ख्वाब था सबको अपनी जिंदगी में मेरी तरह ही कुछ करना था। जैसे तैसे एक नौकरी लगी वो भी मेरी पसंद की नही थी पर पापा का हाथ बंटाने के लिए भी तो कुछ करना था अपने दिल को समझकर वो नौकरी कर ली मुझे नौकरी लगी ये सुनकर मम्मी पापा दोनो खुश हो जाए पापा की आखों से तो आंसू ही आ गए आंखो से निकलते आंसू भी उस दिन मुझसे बात कर रहे थे मानो वो ये कह रहे थे की अब मेरे कंधो का थोड़ा बोझ कम हुआ मेरे साथ कोई कमाने वाला आ गया। उस दिन से मैंने वो नौकरी ज्वाइन कर ली और उसकी भी आदत सी पड़ गई।