yaad han mujhe mere saare gunaah,
ek mohabbat karalee,
doosara tumase kar lee,
teesara bepanah kar lee..
याद हँ मुझे मेरे सारे गुनाह,
एक मोहब्बत करली,
दूसरा तुमसे कर ली,
तीसरा बेपनह कर ली..
yaad han mujhe mere saare gunaah,
ek mohabbat karalee,
doosara tumase kar lee,
teesara bepanah kar lee..
याद हँ मुझे मेरे सारे गुनाह,
एक मोहब्बत करली,
दूसरा तुमसे कर ली,
तीसरा बेपनह कर ली..
बादशाह अकबर की यह आदत थी कि वह अपने दरबारियों से तरह-तरह के प्रश्न किया करते थे। एक दिन बादशाह ने दरबारियों से प्रश्न किया, “अगर सबकी दाढी में आग लग जाए, जिसमें मैं भी शामिल हूं तो पहले आप किसकी दाढी की आग बुझायेंगे?”
“हुजूर की दाढी की” सभी सभासद एक साथ बोल पड़े।
मगर बीरबल ने कहा – “हुजूर, सबसे पहले मैं अपनी दाढी की आग बुझाऊंगा, फिर किसी और की दाढी की ओर देखूंगा।”
बीरबल के उत्तर से बादशाह बहुत खुश हुए और बोले- “मुझे खुश करने के उद्देश्य से आप सब लोग झूठ बोल रहे थे। सच बात तो यह है कि हर आदमी पहले अपने बारे में सोचता है।”
Aksar Hum Apni Raat Yun Barbaad Karte Hain
Baith Ke Kisi Kone Me Unko Yaad Karte Hain
Unke Wapis Aane Ki Ummid Toh Chhod Di Kab Ki
Phir Bhi Na Jane Kyu Hum Apna Waqt Barbaad Karte Hain