Manzil mil hi jaayegi, Bhatakte hue hi sahi,
Gumraah to wo hain, jo ghar se nikle hi nahi✌
मंज़िल मिल ही जाएगी, भटकते हुए ही सही,
गुमराह तो वो लोग हैं, जो घर से निकले ही नही✌
Enjoy Every Movement of life!
Manzil mil hi jaayegi, Bhatakte hue hi sahi,
Gumraah to wo hain, jo ghar se nikle hi nahi✌
मंज़िल मिल ही जाएगी, भटकते हुए ही सही,
गुमराह तो वो लोग हैं, जो घर से निकले ही नही✌
उसे जाते हुये मैंने रोका बहोत था
ये दिल अपनी सफाई मे चीखा बहोत था ,
जिस शफ मे खड़े थे हम अपनी सच्चाई लेके
उसमे झूठ बिका बहोत था ।
मैं थक गया था अपनी सफाई देके
पर रकीब का फसाना भरी बहोत था ।
……….अजय महायच .
