main tan ik kach da sheesha han
tuttna meri fitrat hai
ese lai tan mainu pathraan ton koi shikayat ni
ਮੈਂ ਤਾਂ ਇਕ ਕੱਚ ਦਾ ਸ਼ੀਸ਼ਾ ਹਾਂ
ਟੁੱਟਣਾ ਮੇਰੀ ਫਿਤਰਤ ਹੈ
ਐਸੇ ਲਈ ਤਾਂ ਮੈਨੂੰ ਪਥਰਾਂ ਤੋਂ ਕੋਈ ਸਿਕਾਅਤ ਨੀ ..#GG
main tan ik kach da sheesha han
tuttna meri fitrat hai
ese lai tan mainu pathraan ton koi shikayat ni
ਮੈਂ ਤਾਂ ਇਕ ਕੱਚ ਦਾ ਸ਼ੀਸ਼ਾ ਹਾਂ
ਟੁੱਟਣਾ ਮੇਰੀ ਫਿਤਰਤ ਹੈ
ਐਸੇ ਲਈ ਤਾਂ ਮੈਨੂੰ ਪਥਰਾਂ ਤੋਂ ਕੋਈ ਸਿਕਾਅਤ ਨੀ ..#GG
अकबर बादशाह को मजाक करने की आदत थी। एक दिन उन्होंने नगर के सेठों से कहा-
“आज से तुम लोगों को पहरेदारी करनी पड़ेगी।”
सुनकर सेठ घबरा गए और बीरबल के पास पहुँचकर अपनी फरियाद रखी।
बीरबल ने उन्हें हिम्मत बँधायी,
“तुम सब अपनी पगड़ियों को पैर में और पायजामों को सिर पर लपेटकर रात्रि के समय में नगर में चिल्ला-चिल्लाकर कहते फिरो, अब तो आन पड़ी है।”
उधर बादशाह भी भेष बदलकर नगर में गश्त लगाने निकले। सेठों का यह निराला स्वांग देखकर बादशाह पहले तो हँसे, फिर बोले-“यह सब क्या है ?”
सेठों के मुखिया ने कहा-
“जहाँपनाह, हम सेठ जन्म से गुड़ और तेल बेचने का काम सीखकर आए हैं, भला पहरेदीर क्या कर पाएँगे, अगर इतना ही जानते होते तो लोग हमें बनिया कहकर क्यों पुकारते?”
बादशाह अकबर बीरबल की चाल समझ गए और अपना हुक्म वापस ले लिया।
किसान कविता
बूँद बूँद को तरसे जीवन,
बूँद से तड़पा हर किसान
बूँद नही हैं कही यहाँ पर
गद्दी चढ़े बैठे हैवान.
बूँद मिली तो हो वरदान
बूँद से तरसा हैं किसान
बूँद नही तो इस बादल में
देश का डूबा है अभिमान
बूँद से प्यासा हर किसान
बूँद सरकारों का फरमान
बूँद की राजनीति पर देखों
डूब रहा है हर इंसान.
देव चौधरी