Lakh chaheya ke tainu yaad na karaa
par iraada apni jagah te bewasi apni jagah
ਲੱਖ ਚਾਹਿਆ ਕਿ ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਨਾ ਕਰਾਂ
ਪਰ ਇਰਾਦਾ ਆਪਣੀ ਜਗ੍ਹਾ ਤੇ ਬੇਵਸੀ ਆਪਣੀ ਜਗ੍ਹਾ
Lakh chaheya ke tainu yaad na karaa
par iraada apni jagah te bewasi apni jagah
ਲੱਖ ਚਾਹਿਆ ਕਿ ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਨਾ ਕਰਾਂ
ਪਰ ਇਰਾਦਾ ਆਪਣੀ ਜਗ੍ਹਾ ਤੇ ਬੇਵਸੀ ਆਪਣੀ ਜਗ੍ਹਾ
चाल अभी धीमी है,
पर कदम जाएंगे मंजिल तक जरूर।
हालात अभी उलझे हैं,
पर बदलेंगे मौसम,बिखरेगा हरसू नूर।
हौसलों की कमी नहीं,
क़्त भले ना हो ज्यादा।
शह मात की खेल है जिंदगी,
मंजिल को पाने की, हम रखते हैं माआदा।
पलकें मूंद जाती हैं झंझावतों से,
रास्ते छुप जाते हैं काले बदली की छाँव में।
गुजरना ही होगा अंधियारे सूने गलियारों से,
आशियाना हो चाहे गांव या शहर में।
लक्ष्य जो बुन लिया है विश्वास के तागों से,
अब रुकना नहीं, न झुकना कहीं तुम सफर में ।
डगर ने चुन लिया है तुम्हें साहस के पदचिन्हों से,
धैर्य,सहनशीलता और जीत, होंगे सहचर तुम्हारे सहर में।।
तरुण चौधरी
Bhut kuch sikha hai tootey hoye sapno se🥀…
kuch gairon se,kuch apno se😊..