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Bhool gaye tum hume || hindi shayari best

Bhool gaye tum Hume jaise kabhi kuchh tha hi nahi..

Vo jo sawera tere saath tha , pure din Tera ehsaas tha raat me tere hi khwaab the , khwaabo me naya sa jahaan tha 

Kuchh baatein thi baaton me sapne the ..sapne me hum or hum me tum

Bhool gaye tum hume bach gaye mehez gam 

Bhool gaye tum Hume jaise kabhi kuchh tha hi nahi , vo jo hamara saath tha ek khubsurat sa ehsaas tha haathon me haath tha b

Khair chhodo bhool gaye tum Hume jaise kabhi kuchh tha hi nahi ……

Title: Bhool gaye tum hume || hindi shayari best

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Punjabi shayari love new || Whatsapp video status || couple shayari video

Hai ishq tera vi athra jeha
Menu kehre raahe pa ditta..!!
Kade lagda khuda mere kol jehe
Kade lagda mein dilon bhula ditta..!!
Hai ajab nazare ishqe de
Hanjhu haaseyan nu ikathe dikha ditta..!!
Ki samjha dass rabb paya e mein
Ja samjha rabb mein gawa ditta..!!
ਹੈ ਇਸ਼ਕ ਤੇਰਾ ਵੀ ਅੱਥਰਾ ਜਿਹਾ
ਮੈਨੂੰ ਕਿਹੜੇ ਰਾਹੇ ਪਾ ਦਿੱਤਾ..!!
ਕਦੇ ਲੱਗਦਾ ਖੁਦਾ ਮੇਰੇ ਕੋਲ ਜਿਹੇ
ਕਦੇ ਲੱਗਦਾ ਮੈਂ ਦਿਲੋਂ ਭੁਲਾ ਦਿੱਤਾ..!!
ਹੈ ਅਜਬ ਨਜ਼ਾਰੇ ਇਸ਼ਕੇ ਦੇ
ਹੰਝੂ ਹਾਸਿਆਂ ਨੂੰ ਇਕੱਠੇ ਦਿਖਾ ਦਿੱਤਾ..!!
ਕੀ ਸਮਝਾਂ ਦੱਸ ਰੱਬ ਪਾਇਆ ਏ ਮੈਂ
ਜਾਂ ਸਮਝਾਂ ਰੱਬ ਮੈਂ ਗਵਾ ਦਿੱਤਾ..!!

Title: Punjabi shayari love new || Whatsapp video status || couple shayari video


Hindi kavita || बहती नदी – सी || hindi poetry

थी मै,शांत चित्त बहती नदी – सी
तलहटी में था कुछ जमा हुआ
कुछ बर्फ – सा ,कुछ पत्थर – सा।
शायद कुछ मरा हुआ..
कुछ अधमरा सा।
छोड़ दिया था मैंने
हर आशा व निराशा।
होंठो में मुस्कान लिए
जीवन के जंग में उलझी
कभी सुलगी,कभी सुलझी..
बस बहना सीख लिया था मैंने।
जो लगी थी चोट कभी
जो टूटा था हृदय कभी
उन दरारों को सबसे छुपा लिया था
कर्तव्यों की आड़ में।
फिर एक दिन..
हवा के झोंके के संग
ना जाने कहीं से आया
एक मनभावन चंचल तितली
था वो जरा प्यासा सा
मनमोहक प्यारा सा।
खुशबूओं और पुष्पों
की दुनिया छोड़
सारी असमानताओं और
बंधनों को तोड़
सहमी – बहती नदी को
खुलकर बहना सीखा गया,
अपने प्रेम की गरमी से
बर्फ क्या पत्थर भी पिघला गया।
पाकर विश्वास कोमल भावों से जोड़े नाते का
सारी दबी अपेक्षाएं हो गई फिर जीवंत
लेकिन क्या पता था –
होगा इसका भी एक दिन अंत !
तितली को आयी अपनों की याद
मुड़ चला बगिया की ओर
सह ना सकी ये देख नदी
ये बिछड़न ये एकाकीपन
रोयी , गिड़गिड़ाई ..की मिन्नतें
दर्द दुबारा ये सह न पाऊंगी
सिसक सिसक कर उसे बतलाई।
नहीं सुनना था उसे,
नहीं सुन पाया वो।
नहीं रुकना था उसे,
नहीं रुक पाया वो।
तेज उफान आया नदी में,
क्रोध और अवसाद
छाया मन में,
फिर छला था
नेह जता कर किसी ने।
आवाज देती..लहरें,
उठती और गिरती
किनारों से टकराती,
हो गई घायल।
बीत गए असंख्य क्षण
उसकी वापसी की आस में
लेकिन सामने था, तो सिर्फ शून्य।
हो गई नदी फिर से मौन..
छा गई निरवता।
लेकिन अबकी बार,
नहीं जमा कुछ तलहटी में
कुछ बर्फ सा,
कुछ पत्थर सा।
बस रह गया भीतर
रक्तिम हृदय..
और लाल रक्त।
जो रिस रिस कर
घुलता जा रहा है
मिलता जा रहा है
अपने ही बेरंग पानी में…।।

Title: Hindi kavita || बहती नदी – सी || hindi poetry