oh ejehi chahat c
jisnu me paa na sakeya
ik pal vich bhula gaye
jisnu me bhula na sakeya
ਉਹ ਅਜੇਹੀ ਚਾਹਤ ਸੀ
ਜਿਸਨੂੰ ਮੈਂ ਪਾ ਨਾ ਸਕਿਆ
ਇਕ ਪਲ ਵਿੱਚ ਭੁਲਾ ਗਏ
ਜਿਸਨੂੰ ਮੈਂ ਭੁਲਾ ਨਾ ਸਕਿਆ
oh ejehi chahat c
jisnu me paa na sakeya
ik pal vich bhula gaye
jisnu me bhula na sakeya
ਉਹ ਅਜੇਹੀ ਚਾਹਤ ਸੀ
ਜਿਸਨੂੰ ਮੈਂ ਪਾ ਨਾ ਸਕਿਆ
ਇਕ ਪਲ ਵਿੱਚ ਭੁਲਾ ਗਏ
ਜਿਸਨੂੰ ਮੈਂ ਭੁਲਾ ਨਾ ਸਕਿਆ
Bada jana pehchana sa rishta ban gya ik anjaan ke sath na koi usse pehle na koi uske baad🤍
बड़ा जाना पहचाना सा रिश्ता बन गया इक अंजान के साथ न कोई उससे पहले ना कोई उसके बाद🤍
किसान कविता
बूँद बूँद को तरसे जीवन,
बूँद से तड़पा हर किसान
बूँद नही हैं कही यहाँ पर
गद्दी चढ़े बैठे हैवान.
बूँद मिली तो हो वरदान
बूँद से तरसा हैं किसान
बूँद नही तो इस बादल में
देश का डूबा है अभिमान
बूँद से प्यासा हर किसान
बूँद सरकारों का फरमान
बूँद की राजनीति पर देखों
डूब रहा है हर इंसान.
देव चौधरी