oh ejehi chahat c
jisnu me paa na sakeya
ik pal vich bhula gaye
jisnu me bhula na sakeya
ਉਹ ਅਜੇਹੀ ਚਾਹਤ ਸੀ
ਜਿਸਨੂੰ ਮੈਂ ਪਾ ਨਾ ਸਕਿਆ
ਇਕ ਪਲ ਵਿੱਚ ਭੁਲਾ ਗਏ
ਜਿਸਨੂੰ ਮੈਂ ਭੁਲਾ ਨਾ ਸਕਿਆ
oh ejehi chahat c
jisnu me paa na sakeya
ik pal vich bhula gaye
jisnu me bhula na sakeya
ਉਹ ਅਜੇਹੀ ਚਾਹਤ ਸੀ
ਜਿਸਨੂੰ ਮੈਂ ਪਾ ਨਾ ਸਕਿਆ
ਇਕ ਪਲ ਵਿੱਚ ਭੁਲਾ ਗਏ
ਜਿਸਨੂੰ ਮੈਂ ਭੁਲਾ ਨਾ ਸਕਿਆ
अंकुर मिट्टी में सोया था सपने मै खोया था
नन्हा बीज हवा ने लाकर एक जगह बोया था।
तभी बीज ने ली अंगड़ाई देह जरा सी पाई
आंख खोलकर बाहर आया, दुनिया पड़ी दिखाई
खाद्य मिली पानी भी पाया ऐसे जीवन आया
ऊपर बड़ा इधर, धरती में नीचे उधर समाया।
तने डालिया पत्ते आए और फल मुस्कराए
नन्हा बीज वृक्ष बनकर धरती पर लहराए।
जीता मरता रोगी होता दुख आने पर सोता
वृक्ष सांस लेता बढ़ता है जगता है फिर सोता।
रोज शाम को चिड़िया आती सारी रात बिताती
बड़े सवेरे जाग वृक्ष, पर ची ची ची ची गाती।
छाया आती बड़ी सुआती सब टोली झूट जाती
तरह तरह के खेल वर्क्ष के नीचे बैठ रचती।
Likh y dil diyan gallan panne asi padi janne haan
Chete kr kr oonu khud nu har pal mari janne haan