oh ejehi chahat c
jisnu me paa na sakeya
ik pal vich bhula gaye
jisnu me bhula na sakeya
ਉਹ ਅਜੇਹੀ ਚਾਹਤ ਸੀ
ਜਿਸਨੂੰ ਮੈਂ ਪਾ ਨਾ ਸਕਿਆ
ਇਕ ਪਲ ਵਿੱਚ ਭੁਲਾ ਗਏ
ਜਿਸਨੂੰ ਮੈਂ ਭੁਲਾ ਨਾ ਸਕਿਆ
oh ejehi chahat c
jisnu me paa na sakeya
ik pal vich bhula gaye
jisnu me bhula na sakeya
ਉਹ ਅਜੇਹੀ ਚਾਹਤ ਸੀ
ਜਿਸਨੂੰ ਮੈਂ ਪਾ ਨਾ ਸਕਿਆ
ਇਕ ਪਲ ਵਿੱਚ ਭੁਲਾ ਗਏ
ਜਿਸਨੂੰ ਮੈਂ ਭੁਲਾ ਨਾ ਸਕਿਆ
“थोड़ा थक सा जाता हूं अब मै…
इसलिए, दूर निकलना छोड़ दिया है,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब…
मैंने चलना ही छोड़ दिया है।
फासलें अक्सर रिश्तों में…
अजीब सी दूरियां बढ़ा देते हैं,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब मैंने..
अपनों से मिलना ही छोड़ दिया है।
हाँ जरा सा अकेला महसूस करता हूँ…
खुद को अपनों की ही भीड़ में,
पर ऐसा भी नहीं है कि अब मैंने…
अपनापन ही छोड़ दिया है।
याद तो करता हूँ मैं सभी को… और परवाह भी करता हूँ सब की, पर कितनी करता हूँ… बस, बताना छोड़ दिया है।।”
वो खुद भूखा रहकर तुम्हारा पेट सींच रहा है,
देखो आज,
चेहरे पर मुस्कान लिए भीगी पलकें मीच रहा है,
दो वक्त की रोटी, रोटी देने वालों को नसीब नहीं,
वो कौनसा तुम्हारी भारी जेबों से नोट खीच रहा है....
थोड़ी खुशियां उनकी झोली में भी नसीब हो,
आज दूर है कल वापस मिट्टी के करीब हो,
इक सैलाब ने खूब कोहराम मचाया,
ऐसा ना हो के दूसरा भी करीब हो...