Kadi aa mil yaar pyaareyaa
saanu hizar tere na mareyaa
ਕਦੀ ਆ ਮਿਲ ਯਾਰ ਪਿਆਰਿਆ
ਸਾਨੂੰ ਹਿਜ਼ਰ ਤੇਰੇ ਨੇ ਮਾਰਿਆ
Kadi aa mil yaar pyaareyaa
saanu hizar tere na mareyaa
ਕਦੀ ਆ ਮਿਲ ਯਾਰ ਪਿਆਰਿਆ
ਸਾਨੂੰ ਹਿਜ਼ਰ ਤੇਰੇ ਨੇ ਮਾਰਿਆ
काश,जिंदगी सचमुच किताब होती
पढ़ सकता मैं कि आगे क्या होगा?
क्या पाऊँगा मैं और क्या दिल खोयेगा?
कब थोड़ी खुशी मिलेगी, कब दिल रोयेगा?
काश जिदंगी सचमुच किताब होती,
फाड़ सकता मैं उन लम्हों को
जिन्होने मुझे रुलाया है..
जोड़ता कुछ पन्ने जिनकी यादों ने मुझे हँसाया है…
खोया और कितना पाया है?
हिसाब तो लगा पाता कितना
काश जिदंगी सचमुच किताब होती,
वक्त से आँखें चुराकर पीछे चला जाता..
टूटे सपनों को फिर से अरमानों से सजाता
कुछ पल के लिये मैं भी मुस्कुराता,
काश, जिदंगी सचमुच किताब होती।
Pta nahi kehda nasha hai,
Pta nhi kehde khumar ch haan,
Tu zindagi ch aake chll bhi gya,
Main phir bhi tere hi intzaar ch haan……