
Dil sada hi shukrguzar rkhide ne..!!
Dard beshumar bhawein dewe zindagi
Chehre te haase barkraar rakhide ne..!!

गजल (बे बहर)
जाने क्या हो गया है कैसी इम्तिहान की घड़ी है,
एक आशिक पे ये कैसी सजा आन पड़ी है!
आस भी क्या लगाएं अबकी होली पे हम उनसे,
दुनिया की ये खोखली रस्में तलवार लिए खड़ी है!
मैंने देखें हैं गेसुओं के हंसते रुखसार पे लाली
मगर हमारे चेहरे पे फिर आंसुओं की लड़ी है!
दर्द है, हिज्र है,और धुंधली सी तस्वीर का साया भी
तुम महलों में रहते हो तुमको हमारी क्यों पड़ी है !!
कैसे मुकर जाऊं मैं खुद से किए वादों से अभी,
अब मेरे हाथों में ज़िम्मेदारियों की हथकड़ी है!
तुमको को प्यार है दौलत ए जहां से अच्छा है,
मगर इस जहान में मेरे लिए मां सबसे बड़ी है !!
किसी न किसी पे किसी को ऐतबार हो जाता है ,
अजनबी कोई शख्स यार हो जाता है ,
खूबियों से नहीं होती मोहब्बत सदा ,
खामियों से भी अक्सर प्यार हो जाता है 🥀
किन लफ़्ज़ों में इतनी कड़वी कसैली बात लिखूं ,
मैं सच लिखूं के अपने हालत लिखूं ,
कैसे लिखूं मैं चांदनी रातें ,
जब गरम हो रेत तो कैसे मैं बरसात लिखूं .✨
सभी नग्मे साज़ में गाये नहीं जाते ,
सभी लोग महफ़िल में बुलाये नहीं जाते ,
कुछ पास रह कर भी याद नहीं आते ,
कुछ दूर रह कर भी भूलाये नहीं जाते!❤️