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chehre te kujh galla te kujh || bebe baapu shayari

ਚੇਹਰੇ ਤੇ ਕੁਝ ਗੱਲਾਂ ਤੇ ਕੁਝ 

ਇਦਾਂ ਦੇ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਚ ਬੜੇ ਯਾਰ ਵੇਖੇ

ਮੈਂ ਥਾਂ ਥਾਂ ਤੇ ਬਦਲਦੇ ਹਰ ਇੱਕ ਦੇ ਪਿਆਰ ਵੇਖੇ

ਮੈਂ ਬਹੁਤਾ ਸਿਆਣਾਂ ਤਾਂ ਨੀਂ ਪਰ ਮੈਨੂੰ ਏਣਾ ਜ਼ਰੂਰ ਪਤਾ 

ਬੱਸ ਬੇਬੇ ਬਾਪੂ ਹੀ ਨੇ ਜੋਂ ਪਿਆਰ ਦਾ ਇਥੇ ਲਿਹਾਜ਼ ਵੇਖੇ

 

Chehre te koj gallan te koj

Idda de jindagi ch bade yaar vekhe

Main tha tha te bdaldey har ik de pyaar vekhe

Main bahuta siyanna ta ni par minu enna jarur pata ey

Bas bebe bapu hi ne jo pyaar da ithe lihaaj vekhe

—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ

 

 

Title: chehre te kujh galla te kujh || bebe baapu shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Ehsaas || true love || Punjabi shayari

Saahan naal Saah milke Jo ehsaas bane,
Nhi bnde oh pal bhawein lakha time pass bne..
Uljh jawa Jo Teri zulf de valvala Bane,
Vag lain de mere dil andr jo khla bne..
Jisnu ohna hath laya oh khaasm-khaas bne,
Kaash howa mein hwa da bulla jo tere aas pass bne
Teri deed naal hi kyi shabda de jaal bne,
Karde ohna nu sach jo khulli akhi khayal bne❤️

ਸਾਹਾਂ ਨਾਲ ਸਾਹ ਮਿਲਕੇ ਜੋ ਅਹਿਸਾਸ ਬਣੇ,
ਨਹੀ ਬਣਦੇ ਉਹ ਪਲ ਭਾਵੇਂ ਲੱਖਾ ਟਾਇਮ ਪਾਸ ਬਣੇ।
ਉਲਝ ਜਾਵਾਂ ਜੋ ਤੇਰੀ ਜੁਲਫ ਦੇ ਵਲਵਲਾ ਬਣੇ,
ਵਗ ਲੈਣ ਦੇ ਮੇਰੇ ਦਿਲ ਅੰਦਰ ਜੋ ਖਲਾ ਬਣੇ।
ਜਿਸਨੂੰ ਉਹਨਾ ਹੱਥ ਲਾਇਆ ਉਹ ਖਾਸਮ-ਖਾਸ ਬਣੇ,
ਕਾਸ਼ ਹੋਵਾ ਮੈ ਹਵਾ ਦਾ ਬੁੱਲਾ ਜੋ ਤੇਰੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਬਣੇ।
ਤੇਰੀ ਦੀਦ ਨਾਲ ਹੀ ਕਈ ਸ਼ਬਦਾ ਦੇ ਜਾਲ ਬਣੇ,
ਕਰਦੇ ਉਹਨਾ ਨੂੰ ਸੱਚ ਜੋ ਖੁੱਲ੍ਹੀ ਅੱਖੀ ਖਿਆਲ ਬਣੇ।❤

Title: Ehsaas || true love || Punjabi shayari


कवि और धनवान आदमी : अकबर-बीरबल की कहानी

एक दिन एक कवि किसी धनी आदमी से मिलने गया और उसे कई सुंदर कविताएं इस उम्मीद के साथ सुनाईं कि शायद वह धनवान खुश होकर कुछ ईनाम जरूर देगा। लेकिन वह धनवान भी महाकंजूस था, बोला, “तुम्हारी कविताएं सुनकर दिल खुश हो गया। तुम कल फिर आना, मैं तुम्हें खुश कर दूंगा।”

‘कल शायद अच्छा ईनाम मिलेगा।’ ऐसी कल्पना करता हुआ वह कवि घर पहुंचा और सो गया। अगले दिन वह फिर उस धनवान की हवेली में जा पहुंचा। धनवान बोला, “सुनो कवि महाशय, जैसे तुमने मुझे अपनी कविताएं सुनाकर खुश किया था, उसी तरह मैं भी तुमको बुलाकर खुश हूं। तुमने मुझे कल कुछ भी नहीं दिया, इसलिए मैं भी कुछ नहीं दे रहा, हिसाब बराबर हो गया।”

कवि बेहद निराश हो गया। उसने अपनी आप बीती एक मित्र को कह सुनाई और उस मित्र ने बीरबल को बता दिया। सुनकर बीरबल बोला, “अब जैसा मैं कहता हूं, वैसा करो। तुम उस धनवान से मित्रता करके उसे खाने पर अपने घर बुलाओ। हां, अपने कवि मित्र को भी बुलाना मत भूलना। मैं तो खैर वहां मैंजूद रहूंगा ही।”

कुछ दिनों बाद बीरबल की योजनानुसार कवि के मित्र के घर दोपहर को भोज का कार्यक्रम तय हो गया। नियत समय पर वह धनवान भी आ पहुंचा। उस समय बीरबल, कवि और कुछ अन्य मित्र बातचीत में मशगूल थे। समय गुजरता जा रहा था लेकिन खाने-पीने का कहीं कोई नामोनिशान न था। वे लोग पहले की तरह बातचीत में व्यस्त थे। धनवान की बेचैनी बढ़ती जा रही थी, जब उससे रहा न गया तो बोल ही पड़ा, “भोजन का समय तो कब का हो चुका ? क्या हम यहां खाने पर नहीं आए हैं ?”

“खाना, कैसा खाना ?” बीरबल ने पूछा।

धनवान को अब गुस्सा आ गया, “क्या मतलब है तुम्हारा ? क्या तुमने मुझे यहां खाने पर नहीं बुलाया है ?”

खाने का कोई निमंत्रण नहीं था। यह तो आपको खुश करने के लिए खाने पर आने को कहा गया था।” जवाब बीरबल ने दिया। धनवान का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया, क्रोधित स्वर में बोला, “यह सब क्या है? इस तरह किसी इज्जतदार आदमी को बेइज्जत करना ठीक है क्या ? तुमने मुझसे धोखा किया है।”

अब बीरबल हंसता हुआ बोला, “यदि मैं कहूं कि इसमें कुछ भी गलत नहीं तो…। तुमने इस कवि से यही कहकर धोखा किया था ना कि कल आना, सो मैंने भी कुछ ऐसा ही किया। तुम जैसे लोगों के साथ ऐसा ही व्यवहार होना चाहिए।”

धनवान को अब अपनी गलती का आभास हुआ और उसने कवि को अच्छा ईनाम देकर वहां से विदा ली।

वहां मौजूद सभी बीरबल को प्रशंसा भरी नजरों से देखने लगे।

Title: कवि और धनवान आदमी : अकबर-बीरबल की कहानी