
jin pathro ko sajda kiya
chott bhi unse khai hai

Tum Chahe kitna bhi aansu bha lo,
usse dusron ko koi fark nahi padhta
aankhe to hamari hoti hai,
par aansu hamesha dusron ke liye hi hote hai
तुम चाहे कितना भी आंसू बहा लो,
उससे दूसरों को कोई फर्क नहीं पड़ता।
आंखें तो हमारी होती है।
पर आंसू हमेशा दूसरों के लिए ही होते हैं।
आसमां छूने की ख्वाहिश किसकी नहीं होती,
बस फर्क इतना है, हर किसी की पूरी नहीं होती,
पूरी होती है उनकी, जो पसीने की बूंदे नही गिनते ,
अब दुआओं में मेहनत जितनी बरकत कहां होती,
किसने कहा दुआओं से सब हासिल हो जाता है,
ऐसा कुछ होता तो आज किसी की हसरतें बाकी ना होती,
मसला हसरतों का है इसीलिए मेहनत की तालीम सीखी है,
कुछ तो कमी है खुदा मेरे, जो दुआएं आज थोड़ी फीकी है...