Sochti hogi tum bhi mujhkon
bas maanti nahi hogi
Tumhain pyaar se pukarnewali
pehli awaaz joh meri thi…🍂
सोचती होगी तुम भी मुझको
बस मानती नहीं होगी
तुम्हें प्यार से पुकारनेवाली
पहली आवाज़ जो मेरी थी…🍂
अगर किसी इंसान को अच्छे से समझना चाहते हो तो उसे बोलने दो क्योंकि हर इंसान की सच्चाई उसकी जुबान के पीछे छिपी हुई है।
मंजिल मेरे कदमों से अभी दूर बहुत है… मगर तसल्ली ये है कि कदम मेरे साथ हैं
बात करने का मजा उन लोगो के साथ आता है, जिनके साथ कुछ बोलने से पहले कुछ सोचना ना पड़े।
जिस तरह लौहे का जंग लोहे को नष्ट कर देता हैं, उसी तरह इंसान की गलत सोच, इंसान को अपंग बना देती हैं।